प्रभु के अनंत वैभव के समक्ष मानव का वैभव नगण्य है: विभाश्री माताजी

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कोटा। मुनिसुव्रतनाथ दिगंबर जैन मंदिर त्रिकाल चौबीसी परिसर, आर.के.पुरम के तत्वावधान में आयोजित सिद्धचक्र महामंडल विधान में मंगलवार को श्रद्धालुओं ने गहन श्रद्धा के साथ अर्घ अर्पित किए। मंदिर परिसर मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों से गुंजायमान रहा।

आयोजन गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी एवं आर्यिका विनयश्री माताजी के मंगल सान्निध्य में संपन्न हो रहा है। मंदिर अध्यक्ष अंकित जैन ने बताया कि प्रातः 6 बजे से मंत्रजाप, सहस्त्रनाम धारा, अभिषेक, शांतिधारा एवं विधान सहित विविध धार्मिक अनुष्ठान विधिपूर्वक आयोजित किए गए, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर पुण्यार्जन किया।

धर्मसभा में प्रवचन देते हुए आर्यिका विभाश्री माताजी ने कहा कि जब तक मनुष्य के अंतर्मन में ज्ञान, पद अथवा वैभव का अहंकार विद्यमान है, तब तक सम्यकदर्शन की प्राप्ति नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि सांसारिक उपलब्धियों पर गर्व करना व्यर्थ है, क्योंकि प्रभु के अनंत वैभव के समक्ष मानव का वैभव नगण्य है।

‘मान’ विषय पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए माताजी ने बताया कि शास्त्रों में वर्णित ज्ञान, पूजा, कुल, जाति, बल, ऋद्धि, तप और शरीर—ये आठ प्रकार के मद आत्मोन्नति में बाधक बनते हैं।

धर्मसभा में समिति उपाध्यक्ष लोकेश जैन बरमुंडा, निर्देशक विनोद टोरड़ी, संयोजक पदम जैन दुगरिया, कार्याध्यक्ष प्रकाश सेठिया, मुकेश पापड़ीवाल, अक्षय जैन, संजय जैन सहित अनेक गणमान्य सदस्य एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।