कोटा। महावीर नगर प्रथम स्थित प्रज्ञालोक में आयोजित 9 दिवसीय जिनेन्द्र महाअर्चना महोत्सव की शुरुआत शनिवार को आचार्य प्रज्ञासागरमुनिराज के सान्निध्य एवं मार्गदर्शन में हुई। श्रीजी की शांतिधारी के बाद सुबह 8:30 बजे पंच परमेष्ठी विधान संपन्न कराया गया।
आचार्य प्रज्ञासागर मुनिराज ने प्रवचन में कहा कि पंच परमेष्ठी विधान जैन धर्म की अत्यंत महत्वपूर्ण पूजा विधि है, जिसमें अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और साधु की वंदना और गुणगान किया जाता है। इससे साधक पापों का क्षय, सुख, शांति और मोक्ष की प्राप्ति की प्रार्थना करता है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विधान में वस्त्र और रंगों का संबंध केवल अवसर की शोभा और उत्साह से है, इसे सम्यक या मिथ्यात्व से जोड़ना अनुचित है।
महामंत्री नवीन दौराया ने बताया कि महोत्सव के अंतर्गत 28 सितम्बर को श्री कल्पनाथ मंदिर विधान, 29 सितम्बर को श्री मृत्युंजय विधान, 30 सितम्बर को श्री नक्षत्र विधान और 1 अक्टूबर को श्री शांतिनाथ विधान के साथ आयोजन का समापन होगा।

