पुण्य के प्रताप से मिले धन, वैभव को पाप में लगाकर अपना आने वाला कल मत बिगाड़ो

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कोटा। श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर तलवंडी में विगत छह दिनों से सिद्धों की आराधना स्वरूप भव्य अनुष्ठान का आयोजन श्रद्धा एवं आध्यात्मिक उल्लास के साथ किया जा रहा है। भैयाजी आदिकुमार के निर्देशन तथा अनिशा के सुमधुर गायन व संगीत की पावन लहरियों के मध्य चल रहे इस आयोजन ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया है।

अपने प्रेरक उद्बोधन में भैयाजी ने कहा कि पुण्य के प्रताप से प्राप्त धन-वैभव को यदि पाप में लगाया जाए तो यह अपने आने वाले कल को अंधकारमय बना देता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया कि जिस प्रकार दूध में दही, मक्खन और घी की संभावनाएँ निहित रहती हैं, बीज में विशाल वृक्ष बनने की क्षमता होती है और पाषाण में प्रतिमा बनने का सामर्थ्य छिपा रहता है, उसी प्रकार प्रत्येक जीव में परमात्मा बनने की असीम संभावना विद्यमान है। किंतु अज्ञानवश हम उसे देख नहीं पाते। सिद्ध परमात्मा अनंत गुणों से सम्पन्न हैं और हम अपनी अल्प बुद्धि के अनुसार ही उनकी भक्ति कर पाते हैं।

मंदिर के महामंत्री प्रकाश सामरिया ने बताया कि मंदिर में नंदीश्वर दीप विधान का आयोजन निरंतर छठे दिन भी जारी रहा। प्रतिदिन सोधर्म इंद्र एवं द्रव्य पुण्यार्जक परिवारों का चयन किया जा रहा है। 3 मार्च को विधान का समापन विश्व शांति एवं प्राणी मात्र के कल्याणार्थ महायज्ञ के साथ होगा। तीन प्रमुख पात्रों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ अग्निकुंड में आहुतियाँ अर्पित की जाएंगी, जो वर्तमान वैश्विक परिप्रेक्ष्य में विशेष प्रासंगिक मानी जा रही हैं।