जयपुर। राजस्थान में जनगणना को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। राज्य में जनगणना के पहले चरण की तारीखें तय कर दी गई हैं। सांख्यिकी विभाग ने जनगणना के पहले फेज की अधिसूचना जारी कर दी है।
इसके तहत प्रदेशभर में मकान सूचीकरण (हाउस लिस्टिंग) का कार्य 16 मई से 14 जून 2026 तक किया जाएगा। खास बात यह है कि इस बार जनगणना प्रक्रिया में आम लोगों को भी सीधे तौर पर शामिल किया जा रहा है। पहली बार सेल्फ सेंसस यानी स्व-गणना का विकल्प दिया गया है, जिसके तहत लोग खुद अपनी जानकारी ऑनलाइन भर सकेंगे।
जनगणना के पहले फेज से पहले आमजन को 1 मई से 15 मई तक सेल्फ सेंसस का मौका मिलेगा। इसके लिए सरकार जल्द ही एक विशेष पोर्टल और मोबाइल एप लॉन्च करेगी। इस पोर्टल और एप के माध्यम से लोग अपने मकान और उससे जुड़ी जरूरी जानकारियां खुद अपलोड कर सकेंगे। हालांकि, सेल्फ सेंसस के जरिए भरी गई जानकारी को अंतिम रूप देने से पहले जनगणना में तैनात कर्मचारी उसका सत्यापन करेंगे। स्व-गणना की 15 दिन की अवधि पूरी होने के बाद सरकारी कर्मचारियों की टीम घर-घर जाकर हाउस लिस्टिंग का कार्य करेगी।
पहले चरण की जनगणना में केवल मकानों और आवासीय इकाइयों का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इसमें यह दर्ज किया जाएगा कि किसी क्षेत्र में कितने मकान हैं, वे आवासीय हैं या गैर-आवासीय, उनमें कितने परिवार रहते हैं और अन्य बुनियादी जानकारियां। लोगों की वास्तविक गिनती यानी जनसंख्या गणना दूसरे फेज में की जाएगी, जो अगले साल होगी। दूसरे चरण की अधिसूचना अलग से जारी की जाएगी।
पहली बार होगी जातीय जनगणना
इस बार जनगणना की सबसे अहम विशेषता यह है कि पहली बार जातीय जनगणना भी कराई जाएगी। इससे सामाजिक और आर्थिक योजनाओं के लिए सरकार को विस्तृत और सटीक आंकड़े मिल सकेंगे। केंद्र सरकार की ओर से देशभर में जनगणना-2027 का कार्यक्रम इसी साल से शुरू किया जा रहा है। हालांकि, राज्यों को यह छूट दी गई है कि वे अपने हिसाब से अलग-अलग समय पर इसकी शुरुआत करें। राजस्थान में इसकी शुरुआत मई 2026 से होगी।
लाखों कर्मचारियों के ट्रांसफर पर रोक
जनगणना प्रक्रिया को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। जनगणना से जुड़े कर्मचारियों और अधिकारियों के ट्रांसफर पर पूरी प्रक्रिया समाप्त होने तक रोक लगा दी गई है। यह अवधि करीब सवा साल तक की हो सकती है। इस दायरे में कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार, शहरी निकायों के आयुक्त, शिक्षक, पटवारी, ग्राम सचिव और अन्य कर्मचारी शामिल हैं, जिन्हें प्रगणक या सुपरवाइजर के रूप में जनगणना कार्य में लगाया जाएगा। ट्रांसफर केवल असाधारण परिस्थितियों में ही किए जा सकेंगे।
फरवरी से शुरू होगी ट्रेनिंग
जनगणना से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों की ट्रेनिंग फरवरी से शुरू की जाएगी। इस विशाल प्रक्रिया में 2 लाख से अधिक कर्मचारी और अधिकारी लगाए जाएंगे। घर-घर जाकर हाउस लिस्टिंग और जनगणना करने के लिए करीब 1.60 लाख प्रगणक नियुक्त किए जाएंगे। इसके अलावा 30 से 40 हजार सुपरवाइजर और अन्य अधिकारी निगरानी और सत्यापन का काम संभालेंगे।
सरकार को मिलेंगे सटीक आंकड़े
राज्य सरकार का मानना है कि सेल्फ सेंसस और डिजिटल माध्यमों के उपयोग से जनगणना अधिक पारदर्शी, तेज और सटीक होगी। इससे समय की बचत के साथ-साथ त्रुटियों में भी कमी आएगी। जनगणना से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग विकास योजनाओं, बजट आवंटन, सामाजिक कल्याण योजनाओं और प्रशासनिक निर्णयों में किया जाएगा।

