पद्म श्री BBC के पूर्व पत्रकार मार्क टली नहीं रहे, 90 की उम्र में दुनिया से अलविदा

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नई दिल्ली। प्रसिद्ध ब्रिटिश पत्रकार और ब्रॉडकास्टर मार्क टली अब इस दुनिया में नहीं रहे। उनकी उम्र 90 साल थी। कई दशकों तक वे भारत में BBC की आवाज माने जाते थे। उनकी गर्म और गहरी आवाज दुनिया भर के सुनने वालों को बहुत पसंद थी।

टली का जन्म 1935 में कलकत्ता में हुआ था, जो देश में ब्रिटिश राज था। उनके पिता यहां व्यापार करते थे और मां बंगाल में जन्मी थीं। परिवार कई पीढ़ियों से भारत से जुड़ा हुआ था। भारत में उन्हें बहुत स्नेह से ‘टली साहब’ कहकर बुलाते थे। उनकी खुशमिजाजी और भारत से सच्चा लगाव उन्हें यहां के बड़े नेताओं, संपादकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का दोस्त बना देता था।

उन्होंने भारत में कई बड़ी घटनाओं को कवर किया जिसमें युद्ध, अकाल, दंगे, हत्याएं, भोपाल गैस कांड और अमृतसर के स्वर्ण मंदिर पर भारतीय सेना का ऑपरेशन। 1975 में इंदिरा गांधी के इमरजेंसी के समय उन्हें 24 घंटे के अंदर देश छोड़ने को कहा गया था। लेकिन डेढ़ साल बाद वे वापस लौट आए और दिल्ली में ही बस गए।

BBC में वे लंबे समय तक दिल्ली ब्यूरो के प्रमुख रहे। उन्होंने सिर्फ भारत ही नहीं, पूरे दक्षिण एशिया की खबरें दीं। उन्होंने बांग्लादेश का जन्म, पाकिस्तान में सैन्य शासन, श्रीलंका में तमिल टाइगर्स का संघर्ष और अफगानिस्तान में सोवियत सेना का दखल का कवर किया।

वे ट्रेन से सफर करना पसंद करते थे और आम भारतीयों की बातें भी उतनी ही ध्यान से सुनते थे, जितना नेताओं की। कभी कुर्ता पहनकर, कभी शर्ट-टाई में, वे दोनों में सहज दिखते थे।

1993 में उन्होंने BBC के तत्कालीन डायरेक्टर जनरल पर ‘डर के माहौल’ से चलाने का आरोप लगाया और अगले साल इस्तीफा दे दिया। इसके बाद भी वे रेडियो 4 पर ‘समथिंग अंडरस्टूड’ प्रोग्राम चलाते रहे, जिसमें आस्था और आध्यात्मिक मुद्दों पर बात होती थी।

पद्म श्री और पद्म भूषण से सम्मानित
भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री और पद्म भूषण दिए। ब्रिटेन ने 2002 में उन्हें नाइट की उपाधि से नवाजा। उन्होंने इसे भारत के लिए सम्मान बताया। बाद में उन्हें ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया भी बनाया गया। वे कहते थे कि वे भारत और ब्रिटेन दोनों देशों के हैं।