300 साधु-संन्यासियों की निःशुल्क नेत्र जाँच कर नेत्रदान का महासंकल्प दिलाया
कोटा। प्रयागराज की पावन धरती पर माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या के पवित्र अवसर पर आस्था और सेवा का एक अद्भुत संगम देखने को मिला। जब संगम तट पर लाखों श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगा रहे थे, तब कोटा के सुप्रसिद्ध नेत्र सर्जन, लेखक और मोटिवेशनल स्पीकर डॉ. सुरेश पाण्डेय ने अपनी टीम के साथ मिलकर भक्ति को मानव सेवा का रूप दिया।
18 जनवरी को महंत बालकदास जी महाराज के शिविर में आयोजित इस विशाल निशुल्क नेत्र जांच एवं जागरूकता शिविर में सुवि नेत्र चिकित्सालय कोटा के नेत्र सर्जन डॉ. सुरेश पाण्डेय ने लगभग 300 साधु-संन्यासियों और कल्पवासियों का गहन नेत्र परीक्षण किया और उन्हें निशुल्क आई-ड्रॉप्स वितरित किए।
इस पावन मौके पर एक अत्यंत भावपूर्ण क्षण तब आया जब डॉ. सुरेश पाण्डेय ने प्रयागराज माघ मेला परिसर खाक चौक के अध्यक्ष सतुआ बाबा (महाराज संतोष दास) और महाराज गोपालदास को अपनी बहुचर्चित मोटिवेशनल पुस्तक जिंदगी का जश्न: सुखद, सफल, और सार्थक जीवन के 101 सुनहरे सूत्र भेंट की, जिसे संतों ने स्नेहपूर्वक स्वीकार कर आशीर्वाद प्रदान किया।
नेत्र चिकित्सा शिविर के दौरान मौजूद देश के कोने-कोने से आए संत, महात्मा और कल्पवासी और तीर्थ चेतना का लाभ लेने पहुंचे। जनसमूह को संबोधित करते हुए वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ. सुरेश पाण्डेय ने मरणोपरांत नेत्रदान करने का संकल्प कराया।
डॉ. सुरेश पाण्डेय ने एक गंभीर चिंता व्यक्त की कि भारत में लगभग 4 करोड़ 95 लाख लोग अंधत्व या गंभीर दृष्टिहीनता के अंधेरे में जी रहे हैं, जो कि वैश्विक स्तर पर सर्वाधिक आंकड़ों में से एक है। उन्होंने बताया कि सबसे बड़ी विडंबना यह है कि इनमें से 85 प्रतिशत से अधिक अंधापन केवल समय पर जांच और इलाज से रोका जा सकता है।
प्रयागराज माघ मेले के अवसर पर एक्सा पैरेंटल लिमिटेड की पूरी टीम, सुमित अग्रवाल, मनीष दुबे, नितिन द्विवेदी और अभिषेक तिवारी द्वारा निःशुल्क आई ड्राॅप का वितरण कर इस पुनीत कार्य में अपना संपूर्ण सहयोग दिया और साबित किया कि करुणा जब कर्म में बदलती है तो चमत्कार होते हैं।
डॉ. पाण्डेय ने कहा कि प्रयागराज की पावन धरती पर संगम के तट पर खड़े होकर उन्हें यह गहरा एहसास हुआ कि अगर आस्था मन को राह दिखाती है, तो आंखें जीवन को दिशा देती हैं। इसी भावना के साथ उन्होंने और उनकी टीम ने अंधत्व मुक्त भारत के लिए अपना संकल्प दोहराया।
सेवा ही सबसे बड़ी प्रार्थना है के मूल मंत्र के साथ संपन्न हुआ यह आयोजन यह संदेश देने में सफल रहा कि जागरूकता, नियमित नेत्र परीक्षण और नेत्रदान महादान के महासंकल्प के माध्यम से भारत से उस उपचार योग्य अंधता को मिटाया जा सकता है जिसे रोका जाना संभव है।

