मुकेश भाटिया, कमोडिटी एक्सपर्ट
कोटा। बासमती धान के सभी प्रजाति की फसल अगेती-पिछेती बिजाई के अनुसार धीरे-धीरे मंडियों में आने लगी है, जबकि अभी तक खेतों में तैयार धान की फसल को कोई नुकसान नही दिखाई दे रहा है। वही दूसरे देशों की उत्पादकता एवं पुराने माल के स्टॉक को देखते हुए नये सीजन पर घरेलू व्यापारियों एवं निर्यात को व्यापार में लाभ मिलने की पूरी संभावना दिखाई दे रही है।
बाजार के जानकार विशेषज्ञों के अनुसार हरियाणा एवं पंजाब में नया 1509 धान आने लगा है, इसके अलावा 15-20 दिन बाद 1121 धान भी आने लगेगा। हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान एवं बासमती प्रजाति के धान की बिजाई सामान्य से 10 फीसदी औसतन अधिक हुई है, दूसरी ओर सभी क्षेत्रों में खड़ी फसल प्रत्यक्षदर्शी बहुत बढ़िया बता रहे है। इस बार समय-समय पर प्राकृतिक बारिश भी भरपूर होने से फसल को लाभ मिला है। इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए धान क्वालिटी एवं क्वांटिटी दोनों ही उत्तम रहेगा।
हालांकि, इस समय 1509 धान, जो कम नमी वाला 2150/2200 रूपए प्रति क्विंटल बिक रहा है, उसमें 400 रूपए प्रति क्विंटल का और मंदा आ सकता है।
अभी 1121 धान नही आ रहा है, पुराना माल 2800 औसतन बिक रहा है। यह भी नये माल आने पर इस बार 2250/2300 रूपए प्रति क्विंटल कम नमी वाला नीचे में बन सकता है।* इस बार इससे नीचे जाना मुश्किल लग रहा है, क्योकि पुराना धान तथा चावल किसी भी मंडी एवं राइस मिल में नही के बराबर है, दूसरी ओर यूरोपीय देशों में ऊंची कीमत चल रहे है।
जानकारों के अनुसार, इधर खाड़ी देशों में भी अन्य देशों की तुलना में भारतीय सेला चावल के आयात पड़ते सस्ते लग रहे है। इन परिस्थितियों से इस सीजन में निर्यात में वृद्धि की संभावना अधिक बताई जा रही है। हरियाणा एवं पंजाब में नया 1509 धान प्रति मंडी 200-250 बोरी आने लगा है। अभी नमी 20-22 फीसदी होने से 1850/1950 रूपए प्रति क्विंटल के बीच कीमत खुले है। अभी वह माल लोकल में खरीदकर, कच्ची मंडियों के व्यापारी धूप में सुखा रहे है।
उन मालों में राइस मिलों की कोई लिवाली नही है।
बीते वर्ष बासमती प्रजाति के धान का उत्पादन 475/480 लाख टन के करीब हुआ था, जो इस बार 490/492 लाख टन होने का अनुमान आ रहा है। जिसमें धान की क्वालिटी को देखकर 300 लाख टन चावल सेला व स्टीम बैठेगा। राइस मिलों में पुराना धान व चावल का स्टॉक लगभग समाप्त हो चुका है, जिससे चावल सेला व स्टीम में 500 से अधिक का मंदा नया माल का दबाव बनने पर भी मुश्किल लग रहा है।

