कोटा। राष्ट्रीय मेला दशहरा 2025 के तहत बुधवार को गढ़ में पूजा- अर्चना के बाद गढ़ के दरीखाने से राजसी वैभव और ठाट-बाट के साथ हाथी पर सवार होकर भगवान लक्ष्मीनारायण जी की सवारी निकाली गई। इससे पहले गढ़ पैलेस में परम्परागत दरीखाना सजा।
शोभायात्रा में महाराव इज्येराज सिंह खुली जीप में सवार होकर चल रहे थे। सवारी गढ़ पैलेस से रवाना होकर किशोरपुरा दरवाजे से होते हुए दशहरा मैदान पहुंची। भगवान लक्ष्मीनारायण जी की सवारी में झांकियों के अलावा राम और रावण की सेना युद्ध करते हुए दिखी।

राक्षस घोड़ों पर सवार थे, तो वानर सेना हाथों में गदा लिए उनसे लड़ रही थी। माँ कालिका द्वारा असुर संहार और रौद्र रूप भी जनता को रास आया। शोभायात्रा मार्ग में दोनों ओर खड़े लोगों ने भगवान लक्ष्मीनारायण जी के जयकारे लगाए।
सवारी में सबसे आगे घुडसवार थे। श्री राम, लक्ष्मण, सीता, सुग्रीव, अंगद, विभीषण, नल, नील, जामवंत, बाहुबली हनुमान, काली माता समेत विभिन्न झांकियां थीं। रावण बने राजाराम कर्मयोगी भी मेघनाद और कुंभकर्ण के साथ चल रहे थे।
राजस्थानी कच्ची घोड़ी नृत्य, कजरी नृत्य घूमर नृत्य, बिंदोरी नृत्य का प्रदर्शन किया जा रहा था। वहीं सहरिया जनजाति तथा भील जनजाति की ओर से भी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गई। साथ ही, अरुणाचल प्रदेश का टपू नृत्य, पश्चिम बंगाल का छाऊ नृत्य और केरल का कुंभाटी नृत्य भी प्रदर्शित हुआ।
इस दौरान महिलाएं मंगल गीत गाते हुए चल रहीं थीं। शोभायात्रा में वानर सैनिक और रावण के सैनिक युद्ध करते हुए चल रहे थे। साथ ही, रावण और जटायु के बीच युद्ध का दृश्य भी जीवंत हो रहा था। इस दौरान घोड़ा बग्घी, ऊंटगाड़ी भी मौजूद रही।
भगवान की सवारी के साथ ऊँटगाड़ी में युद्ध के नगाड़े बजते हुए युद्ध दृश्य बना रहे थे। तुरही, ढोल, ताशे भी बज उठे। मधुर स्वर लहरियां बिखेरते बैंड झूमने पर मजबूर कर रहे थे। साथ ही मशक बैंड, आर्मी बैंड और पुलिस बैंड भी था। गोदावरी धाम की वानर सेना भी भगवा पताकाएं थामें जय श्रीराम का उद्घोष करती हुई चल रही थीं।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर, ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर, विधायक संदीप शर्मा, जिला कलेक्टर पीयूष समारिया, मेला समिति अध्यक्ष विवेक राजवंशी, मेला अधिकारी अशोक त्यागी समेत मेला समिति सदस्य, अधिकारी और जनप्रतिनिधि दरीखाने पर मौजूद रहे। हाड़ौती के पूर्व ठिकानों के प्रतिनिधि परम्परागत वेशभूषा में सज-धज कर मौजूद रहे। सभी ने एक दूसरे को दशहरा की बधाई देते हुए रामा श्यामी की।

