कोटा। कथावाचक सौरभ कृष्ण महाराज की श्रीमद्भागवत कथा सोमवार से भाटी चौक छावनी में तुलसी यात्रा के साथ प्रारम्भ हुई। कथा के प्रथम दिन मंगलेश्वर महादेव व्यायामशाला से तुलसी यात्रा निकाली गई। इस दौरान महिलाएं कलश के स्थान पर तुलसी का पौधा सिर पर रखकर चल रहीं थीं। जिसे आयोजकों की ओर से निशुल्क वितरित किया गया था।
तुलसी यात्रा के पश्चात महिलाएं तुलसी का पौधा और गमला अपने साथ ले गईं। तुलसी यात्रा मंगलेश्वर व्यायामशाला से प्रारंभ होकर तिलक स्कूल, खिलती कलियां, ललिता लोहानी, क्षमा कॉलोनी, लालबाई माताजी, रामकुमार गली होते हुए कथा स्थल भाटी चौक पहुंची। इस दौरान घोड़े, बग्घी के साथ ही डीजे और बैंड मधुर स्वर लहरियां बिखेरते चल रहे थे।
कथा के दौरान व्यासपीठ से सौरभ कृष्ण महाराज ने पहले दिन कथा महात्म्य बताया। उन्होंने कहा कि भागवत स्वयं भगवान का वांग्मई स्वरूप है। भागवत के अंदर किसी देवी या देवता या हनुमान जी या भैरव बाबा की स्तुति नहीं की गई है। केवल सत्य की स्तुति की गई है। सत्य से बढ़कर कोई धर्म नहीं है। भागवत पंचम वेद है।
आचार्य श्री शुकदेव महाराज का यज्ञोपवीत संस्कार भी नहीं हुआ। लौकिक बौद्धिक कर्मों से अनुष्ठान का अवसर भी नहीं आया। तभी आचार्य शुकदेव महाराज जंगल के लिए निकल गए। उन्होंने कहा कि माया बांधती है और भगवान माया से अलग कर देते हैं।
आयोजक विजय सिंह ने बताया कि प्रतिदिन 12 से 4 बजे तक भाटी चौक छावनी में श्रीमद्भागवत कथा की जा रही है। इस दौरान मोहन सिंह सिसोदिया, इंद्र सिंह हाड़ा, राजेंद्र सिंह हाड़ा, कांति कंवर, रामकला कंवर, बिशन कंवर, रानी कंवर, लाल सिंह, जगदीश सिंह, जोरावर सिंह, दीपक सिंह, बृजराज सिंह, निर्भय सिंह, सुमित सिंह, मनोज सिंह, शिवराज सिंह, विजय सिंह, जगदीश सिंह, देवेंद्र सिंह, रवि सिंह, रोहित सिंह, जय सिंह हाड़ा उपस्थित रहे।

