तालिबान के सामने घुटनों के बल पाकिस्तान, व्यापार के लिए बॉर्डर खोलने को राजी

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काबुल। अफगानिस्तान के साथ व्यापार बंद करने के मुद्दे पर लंबे समय तक कड़ा रुख दिखाने के बाद पाकिस्तान अब झुकता दिख रहा है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान ने सोमवार को व्यापार के लिए सीमा खोलने पर औपचारिक बातचीत करने के लिए बिजनेस लीडर्स की 13 सदस्यीय संयुक्त समिति बनाई है।

दोनों देशों की सीमा पिछले साल अक्टूबर से सीमा बंद है। अक्टूबर में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में टीटीपी जैसे गुट को पनाह के मुद्दे पर हमले किए थे। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच झड़प हुई और सीमा को बंद कर दिया गया।

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून अखबार ने बताया कि संयुक्त समिति में पाकिस्तान के छह और अफगानिस्तान के सात सदस्य शामिल हैं। पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने वाले सैयद जवाद हुसैन काजमी ने कहा कि बातचीत का मुख्य उद्देश्य पाक-अफगान व्यापार मार्ग फिर से खोलना, सीमा प्रबंधन में आने वाली बाधाओं को दूर करना और द्विपक्षीय व्यापार की निरंतरता सुनिश्चित करना है।

बॉर्डर खुलने की उम्मीद
काजमी ने कहा कि व्यापारियों और आम जनता को होने वाली समस्याओं का स्थायी समाधान प्रदान करने के लिए एक व्यापक और व्यावहारिक रोडमैप तैयार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान सरकार ने कमेटी को सार्थक बातचीत सुनिश्चित करने के लिए पूरी फैसला लेने की अथॉरिटी दी है। उन्होंने तोरखम और अन्य सीमा चौकियों के फिर से खुलने और द्विपक्षीय व्यापार बहाल होने की उम्मीद जताई है।

बीते साल तनाव बढ़ने के बाद पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सभी व्यापारिक रास्ते सभी तरह की आवाजाही के लिए बंद कर दिए गए। इससे जिससे दोनों तरफ के व्यापारियों को भारी वित्तीय नुकसान हुआ है। पाकिस्तान ने पहले कहा था कि वह टीटीपी का मुद्दा नहीं सुलझने तक सीमा नहीं खोलेगा लेकिन आर्थिक नुकसान को देखते हुए अब फिर से सीमा खोलने पर राजी होता दिख रहा है।

क्या है दोनों देशों का मुद्दा
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के संबंध बीते साल अक्टूबर में सीमा पर हुई झड़पों के बाद से संबंध तनावपूर्ण बने हुए हैं। तुर्की, कतर और यूएई ने दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने की कोशिशें की हैं, जो नाकाम रही हैं। पाकिस्तान और अफगानिस्तान में विवाद की जड़ में सशस्त्र गुट TTP है।

पाकिस्तान का कहना है कि टीटीपी के लोग अफगानिस्तान से आकर उसके सुरक्षाकर्मियों पर हमले कर रहे हैं। पाकिस्तान ने टीटीपी को नियंत्रित करने के लिए अफगानिस्तान की तालिबान सरकार से लिखित वादा मांगा है। इस पर तालिबान सहमत नहीं है और दोनों देशों में लगातार विवाद बना हुआ है।