कोटा। Dementia disease: डिमेंशिया एक ऐसी बीमारी है, जिससे मानसिक क्षमता में बहुत अधिक गंभीर गिरावट आती है। इतना ही नहीं यह समय के साथ बिगड़ती चली जाती है। सामान्य तौर पर हो सकता है बुज़ुर्ग चीजों को गलत स्थान पर रख दें या किसी चीज या घटना का विवरण भूल जाएं।
लेकिन डेमेंशिया से पीड़ित लोग हो सकता है सिरे से पूरी घटनाओं को ही भूल जाएं। डेमेंशिया से पीड़ित लोगों को सामान्य रोजमर्रा के कार्यों जैसे ड्राइविंग, खाना पकाने और वित्तीय मामलों से निपटने में कठिनाई होती है। कार्यशाला में मनोचिकित्सक नीना विजयवर्गीय द्वारा डिमेंशिया के लक्षण, संभावित कारण, इससे जुड़ी भ्रांतियां व तथ्य, निवारण, उपचार के उपाय आदि के बारे में विस्तारपूर्वक बताया गया।
उन्होंने बताया कि इस बीमारी के लक्षणों में याददाश्त की कमी होना, निर्णय न ले पाना, बोलने में दिक्कत आना और फिर इसकी वजह से सामाजिक और पारिवारिक समस्याओं की गंभीर स्थिति आदि शामिल हैं। समय के साथ, यह गंभीर स्मृति समस्याओं और रोज़मर्रा के काम करने की क्षमता के नुकसान में बदल जाता है।
विश्व में लगभग 5.5 करोड़ लोग डिमेंशिया से पीड़ित हैं। डिमेंशिया होने के कारणों में मस्तिष्क में होने वाले रसायनिक परिवर्तन, आनुवांशिकी, पारिवारिक इतिहास, सर पर चोट, शारीरिक बीमारियां आदि शामिल हैं।
इस बीमारी में डॉक्टर्स की एक अहम भूमिका होती है जो रोगी में रोग की पहचान करते हैं, उपचार करते हैं और देखभाल के उपाय आदि बताते हैं। दवाइयों से लक्षणों में सुधार हो सकता है या उनकी प्रगति धीमी की जा सकती है। पौष्टिक खाना–पान और स्वस्थ जीवनशैली से डिमेंशिया से लड़ने में फायदा मिलता है।
उन्होंने बताया कि डिमेंशिया के प्रबंधन में परिवार और समाज महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं जो इस बीमारी के बारे में जानकारी लेकर रोगी की मदद कर सकते हैं। इसीलिए कार्यशाला के दौरान काउंसलर व विषय विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम द्वारा जानकारी प्रदान की गई कि डिमेंशिया से पीड़ित रोगी की मदद कैसे की जाए और कैसे रोगी अपना जीवन बीमारी के साथ भी आराम से जी सकते हैं।

