ट्रम्प की नई टैरिफ नीति से भारतीय मसाला कारोबार प्रभावित होने की आशंका

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बोस्टन। Indian spice business: अमरीकी राष्ट्रपति के नई टैरिफ नीति से मसालों के कारोबार पर प्रतिकूल असर पड़ने की संभावना है। ट्रम्प प्रशासन ने दुनिया के एक दर्जन से अधिक देशों पर 1 अगस्त 2025 से ऊंचे में 50 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगाने की घोषणा की है। इसमें वे देश शामिल हैं जिसके साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौता नहीं हुआ और न ही इसके लिए बातचीत हो रही है। इसमें भारत शामिल नहीं है।

मालूम हो कि अमरीका 10 प्रतिशत का आधार आयात शुल्क पहले ही लागू कर चुका है जिससे खाद्य उत्पाद निर्माताओं एवं कच्चे माल (अवयवों) के आपूर्तिकर्ताओं के लिए खर्च बढ़ गया है। नई टैरिफ नीति के आयातकों-निर्यातकों की कठिनाई और बढ़ जाएगी।

अमरीकन स्पाइस ट्रेड एसोसिएशन (आस्टा) के अनुसार वर्ष 2024 के दौरान अमरीका में 50 से अधिक देशों से 2 अरब डॉलर से ज्यादा मूल्य के साबुत मसालों एवं मूल्य संवर्धित मसाला उत्पादों का आयात किया गया। इसमें फ्लेवरिंग इंग्रेडिएंट्स (स्वाद बढ़ाने वाले मसाला उत्पाद) भी शामिल हैं जिसका इस्तेमाल वहां अरबों पौंड के खाद्य उत्पादों के निर्माताओं द्वारा किया जाता है।

एसोसिएशन का कहना है कि नई टैरिफ नीति लागू होने पर दर्जनों मसालों एवं मसाला उत्पादों की कीमतों में भारी इजाफा हो जाएगा। इसमें से अधिकांश मसालों का अमरीका में व्यावसायिक उत्पादन नहीं होता है और विदेशों से भारी मात्रा में आयात किया जाता है।

आयात खर्च में होने वाली वृद्धि का भार सीधे उपभोक्ताओं पर डाला जाएगा जबकि इसका घरेलू उत्पादन बढ़ाने का प्रयास भी नहीं होगा। उदाहरणस्वरूप कालीमिर्च के उत्पादन हेतु गर्म एवं आद्र मौसम की जरूरत पड़ती है जो भारत, श्रीलंका, ब्राजील एवं दक्षिण-पूर्व एशिया- वियतनाम, इंडोनेशिया, मलेशिया एवं थाईलैंड में पाया जाता है।

इसी तरह वैनिला का उत्पादन मुख्यतः मेडागास्कर में होता है और दाल चीनी का उत्पादन श्रीलंका एवं दक्षिण-पूर्व एशिया में किया जाता है। इसका पेड़ होता है जिसकी छाल से दाल चीनी मिलता है। अमरीका में इसका उत्पादन संभव नहीं है।

अमरीका में खाद्य महंगाई की दर पहले से ही ऊंची है जबकि नई टैरिफ नीति से उपभोक्ताओं को अतिरिक्त खर्च करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा। कंपनियों को प्रतिस्पर्धा में बढ़ते रहने के लिए कृत्रिम उत्पादों का सहारा लेना पड़ सकता है।

एक मसाला बनाने वाली कम्पनी का कहना है कि नई टैरिफ पर उसके खर्चे में सालाना 9 करोड़ डॉलर तक का इजाफा हो जाएगा। छोटी-छोटी फर्मों की कठिनाई भी बढ़ेगी। श्रीलंका, वियतनाम, इंडोनेशिया एवं ब्राजील जैसे देशों पर 1 अगस्त से नया आयात शुल्क लागू हो सकता है।