ट्रंप की छटपटाहट बता रही है अमरीकी बादशाहत को खतरा, जानिए कैसे

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वॉशिंगटन। BRICS ब्लॉक का संयुक्त नौसैनिक अभ्यास दक्षिण अफ्रीकी तट के पास शुरू हो गया है। इस अभ्यास पर अमेरिका निगाह बनाए हुए है। इसे अमेरिका की आक्रामक कूटनीति का जवाब भी माना जा रहा है। शनिवार को शुरू हुए एक हफ्ते तक चलने वाले ‘विल फॉर पीस 2026’ अभ्यास का नेतृत्व चीन कर रहा है।

यह अभ्यास हिंद महासागर और अटलांटिक महासागर के मिलन बिंदु के करीब हो रहा है। हालांकि, इसमें भारत शामिल नहीं हुआ है। भारत ने BRICS नौसैनिक अभ्यास में शामिल नहीं होने को लेकर कोई बयान नहीं दिया है। लेकिन, माना जा रहा है कि भारत इस अभ्यास में शामिल होकर अमेरिका को नाराज नहीं करना चाहता है।

अमेरिका BRICS को एक खतरे के तौर पर देखता है। वह इस ब्लॉक को अपने लिए आर्थिक खतरा मानता है। ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका ने ब्रिक्स की स्थापना की थी। हालांकि, बाद में इसका विस्तार किया गया और कई नए देशों की इसकी सदस्यता दिलाई गई।

इनमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान, इंडोनेशिया और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। अमेरिका का मानना है कि BRICS समूह अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने और एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रहा है।

नौसैनिक अभ्यास में कौन से देश शामिल
BRICS नौसैनिक अभ्यास में चीन और ईरान ने डिस्ट्रॉयर भेजे हैं, वहीं रूस और संयुक्त अरब अमीरात ने कॉर्वेट भेजे और दक्षिण अफ्रीका ने एक मध्यम आकार का फ्रिगेट तैनात किया। शनिवार को उद्घाटन समारोह का नेतृत्व कर रहे चीनी अधिकारियों ने कहा कि ब्राजील, मिस्र, इंडोनेशिया और इथियोपिया पर्यवेक्षकों के रूप में अभ्यासों में शामिल हो रहे हैं। दक्षिण अफ्रीका के संयुक्त कार्य बल के कमांडर कैप्टन नंडवाखुलु थॉमस थमाहा ने समारोह के दौरान कहा कि ये अभ्यास सिर्फ एक सैन्य अभ्यास से कहीं ज्यादा हैं और BRICS देशों के समूह के बीच इरादे का एक बयान हैं।