जिसके हृदय में णमोकार समाया हो, उसका संसार कुछ बिगाड़ नहीं सकता मुनि योगसागर

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योगसागर महाराज का तलवंडी में मंगल प्रवेश, अगवानी में जुटे जैन धर्मावलंबी

कोटा। रंग-बिरंगी रंगोलियों, जैन पताकाओं और भव्य स्वागत द्वारों से सजे विहार मार्ग पर गाजे-बाजे के साथ गुरुदेव के जयघोष गूंजते रहे। हर्षोल्लास के इस वातावरण के बीच परम् पूज्य, ज्येष्ठ निर्यापक श्रमण मुनि योगसागर महाराज ससंघ का तलवंडी में मंगल प्रवेश श्री महावीर दिगम्बर जैन मंदिर तलवंडी में हुआ।

महामंत्री प्रकाश सामरिया ने बताया कि इस अवसर पर जैन समाज के सैकड़ों श्रद्धालु नाचते-गाते, ढोल-नगाड़ों के साथ गुरुदेव की अगवानी में सम्मिलित हुए। मार्ग में स्थान-स्थान पर पाद-प्रक्षालन कर श्रद्धालुओं ने भावपूर्वक वंदना की। जुलूस दादाबाडी नसियां जी से होते हुए तलवंडी पहुंचे।

अध्यक्ष अशोक पहाडिया ने बताया कि कार्यक्रम में आचार्य विद्यासागर महा मुनिराज के प्रभावक शिष्य के रूप में गुरुदेव का स्वागत किया गया। विहार मार्ग पर 31 से अधिक तोरण द्वार बनाए गए थे तथा समाजजन जैन ध्वज और गुरुदेव के चित्र-फलक लेकर जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ते रहे।

तलवंडी जैन मंदिर समिति के राजकुमार लुहाडिया ने बताया कि प्रातः 8 बजे से विहार प्रारंभ हुआ। कॉमर्स कॉलेज मार्ग पर गुरुदेव की अगवानी गणिनी आर्यिका विशुद्धमति माताजी एवं पट्ट गणिनी आर्यिका विज्ञश्री माताजी के सान्निध्य में हुई। आर्यिका संघ एवं सकल समाज के गणमान्य नागरिकों ने भी सामूहिक वंदना की। कार्याध्यक्ष जे.के. जैन ने बताया कि गुरुदेव को चौका अर्पित करने के लिए समाजजन बड़ी संख्या में उमड़े तथा कार्यक्रम के दौरान 20 से अधिक चौके लगाए गए।

प्रवचन में मुनि योगसागर महाराज ने कहा कि ज्ञान आत्मा का लक्षण है, इसे प्राप्त नहीं किया जाता, बल्कि प्रकट किया जाता है। अपेक्षा ही दुःख का कारण है। जिसके हृदय में णमोकार समाया हो, उसका संसार कुछ बिगाड़ नहीं सकता। उन्होंने भेदभाव और पक्षपात से ऊपर उठकर संयम, भक्ति और आत्मशुद्धि के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।