नई दिल्ली। अपने खिलाफ महाभियोग प्रक्रिया का सामना कर रहे इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा सुप्रीम कोर्ट से झटका मिलने के बाद आखिरकार संसदीय जांच समिति के सामने पेश हुए।
इस दौरान उन्होंने खुद को निर्दोष बताया और कहा कि दिल्ली स्थित उनके सरकारी आवास पर जब आग लगी थी, तब वह अपने घर पर मौजूद नहीं थे। उन्होंने ये भी दावा किया कि वहां से कोई कैश बरामद नहीं हुआ। लोकसभा स्पीकर द्वारा गठित जांच समिति के सामने उन्होंने अपना जोरदार बचाव किया है।
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस वर्मा ने जांच कमेटी से कहा कि जब घटना हुई तब वह पहले व्यक्ति नहीं थे जो मौके पर पहुंचे थे। इसलिए उन्हें पुलिस और फायर डिपार्टमेंट की कथित लापरवाहियों के लिए ज़म्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
सूत्रों के मुताबिक, जस्टिस वर्मा ने कहा, “अगर पुलिस अधिकारी उनके आवास को सुरक्षित रखने में नाकाम रहे तो उसका खामियाजा हम क्यों भुगतें और हमारे खिलाफ क्यों महाभियोग लाया जाना चाहिए?” जस्टिस वर्मा ने कहा, “वहां मौजूद पुलिस और फायर डिपार्टमेंट के अधिकारी जरूरत के हिसाब से कार्रवाई करने में नाकाम रहे।”
घटना के समय कोई रिकवरी नहीं
संसदीय समिति के समक्ष अपनी बात को रखते हुए जस्टिस वर्मा ने आगे कहा कि शुरू में, घटना के समय कोई रिकवरी नहीं हुई थी, और मौके पर कैश मिलने के दावे बाद में सामने आए। उन्होंने कहा, “अगर मैं मौके पर मौजूद नहीं था और पहला रिस्पॉन्डर नहीं था, तो मुझे इसे सुरक्षित न करने के लिए जिम्मेदार कैसे ठहराया जा सकता है… वह जगह वहां मौजूद लोगों के कंट्रोल में थी।” दरअसल, पिछले साल सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित आंतरिक समिति ने यह निष्कर्ष निकाला था कि जस्टिस वर्मा और उनके परिवार के सदस्यों का उस कमरे पर एक्टिव कंट्रोल था, जहां कैश मिला था।
क्या है मामला?
बता दें कि पिछले साल मार्च में, दिल्ली में जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास में आग लग गई थी। जब अग्निशमन दस्ता के लोग आग बुझाने पहुंचे तो पाया कि जिस स्टोर रूम में आग लगी था, वहां अधजले कैश के ढेर पड़े हैं, जिनमें से कुछ 1.5 फीट से ज्यादा ऊंचे थे। तब के चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने इस घटना का संज्ञान लिया था और जस्टिस वर्मा का ट्रांसफर दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट कर दिया था।
अगस्त 2025 में, लोकसभा स्पीकर ने जज के खिलाफ लाए गए महाभियोग प्रस्ताव पर आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यों का एक पैनल बनाया है, जिसके सामने पेश होकर उन्होंने ये बातें रखी हैं। जस्टिस वर्मा ने हाल ही में महाभियोग प्रक्रिया के दौरान लोकसभा स्पीकर द्वारा जांच समिति के गठन को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, जहां उन्हें संसदीय समिति के सामने पेश होने से राहत नहीं मिल पाई थी।

