मुम्बई। Edible Oil Import: सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) द्वारा संकलित आंकड़ों से पता चलता है कि जनवरी 2025 की तुलना में जनवरी 2026 के दौरान भारत में वनस्पति तेलों (खाद्य एवं अखाद्य) का कुल आयात 11.20 लाख टन से करीब 20 प्रतिशत बढ़कर 13.40 लाख टन पर पहुंच गया।
इसके तहत खाद्य तेलों का आयात 10.80 लाख टन से उछलकर 13.10 लाख टन पर पहुंचा। भारत में मुख्यत: पाम तेल, सोया तेल एवं सूरजमुखी तेल का आयात होता है।
एसोसिएशन के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार यद्यपि जनवरी 2025 के मुकाबले जनवरी 2026 में क्रूड डिगम्ड सोयाबीन तेल का आयात 4,44,026 टन से घटकर 2,78,888 टन तथा क्रूड सूरजमुखी तेल का आयात 2,88,284 टन से गिरकर 2,66,575 टन पर सिमट गया, लेकिन क्रूड पाम तेल (सीपीओ) का आयात इसी अवधि में 2,40,276 टन से उछलकर 7,57,088 टन पर पहुंच गया। इससे कुल आयात में वृद्धि हो गई।
महत्वपूर्ण बात यह है कि आरबीडी पामोलीन के आयात की गति धीमी बनी हुई है। जनवरी 2025 में इसका आयात 31,995 टन दर्ज किया गया था जो जनवरी 2026 में घटकर 3800 टन रह गया। चालू मार्केटिंग सीजन की पहली तिमाही में यानी नवम्बर 2025 से जनवरी 2026 के दौरान देश में आरबीडी पामोलीन का कुल आयात घटकर 9784 टन पर अटक गया
जो नवम्बर 2024-जनवरी-2025 की तिमाही के कुल आयात 4,94,500 टन से बहुत कम रहा। इसके फलस्वरूप समीक्षाधीन अवधि के दौरान खाद्य तेलों के सकल आयात में रिफाइंड पामोलीन की भागीदारी 16 प्रतिशत से घटकर मात्र 2 प्रतिशत रह गई जबकि क्रूड खाद्य तेलों की हिस्सेदारी 84 प्रतिशत से उछलकर 98 प्रतिशत पर पहुंच गई। सीपीओ के आयात में भारी बढ़ोत्तरी दर्ज की गई।
सरकार ने 31 मई 2025 को क्रूड एवं रिफाइंड खाद्य तेलों के आयात पर सीमा शुल्क में अंतर को 9.25 प्रतिशत से बढ़ाकर 19.25 प्रतिशत कर दिया था और उसके बाद से रिफाइंड पामोलीन के आयात की रफ्तार सुस्त पड़ने लगी।
लेकिन दक्षिण एशिया मुक्त व्यापार संधि (साफ्टा) के तहत नेपाल से शून्य शुल्क पर रिफाइंड खाद्य तेलों का भारी आयात जारी है जिससे स्वदेशी रिफाइनर्स को काफी कठिनाई हो रही है।

