कोटा। प्रज्ञालोक में शनिवार को भगवान जिनेन्द्र महाअर्चना के अंतर्गत चौसठ सिद्धि विधान का भव्य आयोजन हुआ। प्रज्ञासागर मुनिराज के सान्निध्य में सम्पन्न इस विधान में मंत्रोच्चारण और धार्मिक अनुष्ठान के बीच श्रद्धालुओं ने आत्मिक शांति का अनुभव किया।
गुरुदेव ने प्रवचन में कहा कि चौसठ रिद्धि विधान साधक को आत्मशुद्धि, समृद्धि, स्वास्थ्य तथा जन्म-जरा-मरण के दुखों से मुक्ति का मार्ग दिखाता है। यह विधान लौकिक शक्तियों की स्मृति में श्रद्धा-भक्ति एवं आत्मकल्याण की भावना से सम्पन्न किया जाना चाहिए। उन्होंने इसे जैन पूजा-पद्धति का अत्यंत शुभ और पुण्यदायक विधान बताया, जो साधक को मोक्षमार्ग की ओर प्रेरित करता है।
महामंत्री नवीन दौराया ने बताया कि 27 सितम्बर को श्री पंचपरमेष्ठी विधान, 28 सितम्बर को श्री कल्पनाथ मंदिर विधान, 29 सितम्बर को श्री मृत्युंजय विधान, 30 सितम्बर को श्री नक्षत्र विधान और 1 अक्टूबर को श्री शांतिनाथ विधान के साथ समापन होगा।

