चीन को गच्चा देकर बीच रास्ते से भारत की ओर मुड़े तेल टैंकर, जानिए क्यों

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नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में अमेरिका-ईरान के बीच जंग और तेज हो चुकी है। नतीजतन कतर के एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर रास लफ्फान और ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमले हुए हैं। मिडिल ईस्ट में जल्द ही तेल और गैस के ठिकानों पर और ज्यादा हमले होने वाले हैं।

ऐसे में भारत समेत एशिया में तेल और गैस की आपूर्ति और बड़े संकट में फंसने वाली है। भारत ने एहतियातन बड़ा कदम उठा लिया है। वह अमेरिका से मिली छूट का जमकर फायदा उठाते हुए तेजी से रूसी तेल जमा कर रहा है।

इस बीच खबर यह आई है कि रूस के कम से कम सात जहाजी तेल टैंकरों ने अचानक अपना रास्ता बदल लिया है। ये जहाजी टैंकर बीच रास्ते ही चीन के बजाय भारत की ओर मुड़ गए। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान-अमेरिका युद्ध से पहुंच रही बाधा के बीच नई दिल्ली ने नए सिरे से अपनी एनर्जी सप्लाई को सुरक्षित करने के लिए पहल की है।

रिपोर्ट के अनुसार, शिप ट्रैकिंग फर्म वोरटेक्सा लिमिटेड रास्ता बदलने वाले इन पोतों की निगरानी कर रही है। ये तब आ रहे हैं, जब पिछले दिनों ही अमेरिका ने समुद्र में खड़े जहाजी टैंकरों में भरे रूसी तेल को खरीदने की मोहलत दी थी।

ये भारत की कूटनीतिक और रणनीतिक जीत का नतीजा है, जो जंग के बीच होर्मुज स्ट्रेट से होकर तेल और गैस की आपूर्ति हो पा रही है। साथ ही रूसी तेल की आपूर्ति में भी तेजी आ गई है। इसके पीछे की बड़ी वजहों को समझते हैं।

शनिवार को पहुंच जाएगा एक्वा टाइटन
रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन से रास्ता बदलकर भारत आने वाले तेल टैंकरों में से एक एक्वा टाइटन भारत के न्यू मंगलूरू पोर्ट पर 21 मार्च यानी शनिवार तक पहुंचने वाला है। यह टैंकर जनवरी के आखिर में रूस के पास बाल्टिक सागर में लोड किया गया था। जहां से वह चीन के लिए चला। पहले इसे चीन के बंदरगाह रिझाओ पर उतरना था। मगर, अमेरिका से छूट मिलने के कुछ दिन बाद ही इसने मार्च के मध्य में यू-टर्न ले लिया और भारत की ओर चल पड़ा।

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट में ब्लूमबर्ग के हवाले से कहा गया है कि एक और टैंकर स्वेजमैक्स जॉजू एन भी गुजरात के जामनगर स्थित सिक्का बंदरगाह पर आ रहा है। बताया जा रहा है कि यह जहाजी तेल टैंकर 25 मार्च को पहुंच सकता है। इसने भी शुरुआती मार्च में ही चीन जाने के बजाय भारत की ओर रुख कर लिया था।

ईरान ने होर्मुज ब्लॉक कर रखा है
भारत के लिए इन सातों तेल टैंकरों का भारत आना राहत की बात है, क्योंकि ईरान ने दुनिया की 20 फीसदी ऑयल और गैस सप्लाई के संकरे रूट होर्मुज स्ट्रेट को तकरीबन ब्लॉक कर रखा है। इसी रूट से भारत का भी करीब 50 फीसदी तेल गुजरता है।