गोलीबारी के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीन कार्ड लॉटरी प्रोग्राम रोका, जानिए भारत पर असर

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वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीन कार्ड लॉटरी प्रोग्राम को सस्पेंड कर दिया है। ट्रंप प्रशासन ने गुरुवार को इसकी जानकारी दी है। लॉटरी पर रोक की वजह हाल ही में ब्राउन यूनिवर्सिटी और MIT में हुई गोलीबारी बताई गई है।

गोलीबारी के आरोपी को ग्रीन कार्ड प्रोग्राम का लाभार्थी बताया जा रहा है। होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी क्रिस्टी नोएम ने बताया कि ट्रंप के निर्देश पर उन्होंने यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज से इस प्रोग्राम को रोकने के लिए कह दिया है। इससे भारतीय भी बड़ी संख्या में प्रभावित होंगे।

ब्राउन विश्वविद्यालय और एमआईटी में गोलीबारी की घटना का संदिग्ध कथित तौर पर ग्रीन कार्ड लॉटरी कार्यक्रम का लाभ उठाकर अमेरिका आया था। इसके बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीन कार्ड लॉटरी कार्यक्रम को स्थगित करने का फैसला लिया है। क्रिस्टी नोएम ने गोलीबारी की घटना के मुख्य संदिग्ध पुर्तगाली नागरिक क्लाउडियो नेवेस वैलेंते पर बात करते हुए कहा कि इस घृणित व्यक्ति को हमारे देश में कभी एंट्री नहीं दी जानी चाहिए थी।

48 साल के नेवेस वैलेंते पर ब्राउन विश्वविद्यालय गोलीबारी में शामिल होने का संदेह है। इस घटना में दो छात्रों की मौत हुई और नौ लोग घायल हुए। गोलीबारी की दूसरी घटना में एमआईटी के एक प्रोफेसर की मौत हो गई थी। अधिकारियों ने बताया कि गुरुवार शाम नेवेस वैलेंते ने गोली मारकर आत्महत्या कर ली।

नेवेस वैलेंते ने साल 2000 में छात्र वीजा पर ब्राउन विश्वविद्यालय में पढ़ाई शुरू की थी। साल 2017 में वैलेंते को विविधता आप्रवासी वीजा मिला। इसके बाद उसे कानूनी रूप से स्थायी निवास का दर्जा हासिल हो गया। यह साफ नहीं हो सका कि 2001 से 2017 में वीजा प्राप्त करने के बीच वह कहां रह रहा था।

ग्रीन कार्ड लॉटरी
वीजा कार्यक्रम के तहत हर साल लॉटरी से 50,000 की संख्या तक ग्रीन कार्ड उन देशों के लोगों को उपलब्ध कराए जाते हैं। इस साल, 2025 में अमेरिका में दो करोड़ लोगों ने वीजा लॉटरी कार्यक्रम के लिए आवेदन किया था। इनमें विजेताओं के पार्टनर सहित 1,31,000 लोगों का चयन हुआ।

लॉटरी विजेताओं को ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने हेतु आमंत्रित किया जाता है। इसके बाद दूतावासों में उनका साक्षात्कार लिया जाता है। इस कार्यक्रम में भारतीय भी बड़ी संख्या में आवेदन करते हैं। ऐसे में ट्रंप के इस फैसले से भारतीयों की भी मुश्किल निश्चित तौर पर बढ़ने जा रही है।