नई दिल्ली। प्रमुख उत्पादक राज्य गुजरात एवं राजस्थान से मिल रहे बिजाई समाचारों को देखते हुए संभावना व्यक्त की जा रही है कि वर्ष 2026 के दौरान भी सौंफ की पैदावार में कमी आएगी। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2024 के दौरान देश में सौंफ की बिजाई का क्षेत्रफल 1.97 लाख हेक्टेयर का रहा था जोकि वर्ष 2025 में घटकर 95/98 हजार हेक्टेयर का रह गया।
हाल ही में गुजरात कृषि विभाग द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार 5 दिसम्बर तक सौंफ की बिजाई 48046 हेक्टेयर पर की गई है जबकि गत वर्ष इसी समयावधि में बिजाई 56106 हेक्टेयर पर की गई थी। इसके अलावा राजस्थान में भी इस वर्ष 20/25 प्रतिशत कम क्षेत्रफल पर बिजाई किए जाने के समाचार मिल रहे हैं।
उत्पादन अनुमान
जानकार सूत्रों का कहना है कि वर्ष 2026 के दौरान देश में सौंफ का उत्पादन अनुमान 15/17 लाख बोरी होने के पूर्वानुमान लगाए जा रहे हैं। जबकि वर्ष 2025 में उत्पादन 18/20 लाख बोरी का रहा था। वर्ष 2024 में सौंफ का रिकॉर्ड उत्पादन 38/40 लाख बोरी (प्रत्येक बोरी 55 किलो) का रहा था।
भाव
उत्पादक केन्द्रों पर कमजोर बिजाई के समाचारों के चलते वर्तमान में सौंफ के भाव मजबूती के साथ बोले जा रहे हैं। विगत एक पखवाड़े के दौरान मंडियों में सौंफ के दाम 200/300 रुपए प्रति क्विंटल तेजी के साथ बोले गए है। जबकि निर्यात का भाव जोकि नवम्बर माह में 89/91 रुपए प्रति किलो चल रहा था। वर्तमान में 95/96 रुपए बोला जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि वर्तमान भावों में अभी अधिक तेजी की संभावना नहीं है क्योंकि चालू माह के अंत तक प्रमुख राज्य गुजरात की मंडियों में नए सौंफ की आवक शुरू हो जाएगी। लेकिन आवक का दबाव कम होने के पश्चात कीमतों में अवश्य ही तेजी आएगी। वर्तमान में उत्पादक केन्द्रों की मंडियों पर एवरेज क्वालिटी सौंफ के भाव 80/120 रुपए बोले जा रहे हैं।
निर्यात कम
वर्ष 2024-25 के दौरान सौंफ का रिकॉर्ड निर्यात होने के पश्चात वर्ष 2025-26 के प्रथम सात माह में सौंफ का निर्यात मात्रात्मक रूप में 65 प्रतिशत घटा है जबकि आय में 53 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। मसाला बोर्ड द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल-अक्टूबर- 2025 के दौरान सौंफ का निर्यात 20850 टन का किया गया और निर्यात से प्राप्त आय 263.89 करोड़ की रही। जबकि अप्रैल-अक्टूबर-2024 में निर्यात 59831 टन का रहा और आय 561.74 करोड़ की रही थी। वर्ष 2024-25 के दौरान सौंफ का कुल निर्यात 76586 टन का हुआ था और आय 765.44 करोड़ की रही थी।

