गंगापुर सिटी में 2×25 केवी ट्रैक्शन सब-स्टेशन सफलतापूर्वक पूर्ण लोड पर चालू
कोटा। पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा मंडल में विद्युत (टीआरडी) विभाग ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। मिशन रफ्तार के तहत गंगापुर सिटी ट्रैक्शन सब-स्टेशन सफलतापूर्वक चालू होने से 160 किमी प्रति घंटा की गति से ट्रेन संचालन की राह और आसान हो गई है।
31 मार्च को गंगापुर सिटी में नवनिर्मित 2×25 केवी ट्रैक्शन सब-स्टेशन को सफलतापूर्वक पूर्ण लोड पर चालू कर दिया गया है। इसके साथ ही संबद्ध फीडर लाइन और ओवरहेड विद्युत लाइन भी क्रियाशील कर दी गई है। यह उपलब्धि कोटा मंडल के लाखों यात्रियों के लिए एक सुखद संदेश है। आने वाले समय में उन्हें और तेज़, समय पर चलने वाली तथा अधिक विश्वसनीय ट्रेन सेवाओं का लाभ मिलेगा।
वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ जैन ने बताया कि गंगापुर सिटी ट्रैक्शन सब-स्टेशन, कोटा मंडल का दूसरा 2×25 केवी सब-स्टेशन है। इससे पूर्व नागदा-मथुरा सेक्शन पर सुवासरा में यह प्रणाली कार्यरत है। नवचालू गंगापुर सिटी सब-स्टेशन मलारना से पिलोदा तक के सेक्शन को विद्युत आपूर्ति प्रदान करेगा, जो कि 100 ट्रैक किलोमीटर की दूरी को कवर करता है।
उन्होंने आगे बताया कि इस नए सब-स्टेशन के चालू होने से कोटा मंडल में 2×25 केवी विद्युत प्रणाली के अंतर्गत कुल ट्रैक किलोमीटर अब 405 हो गई है, जिसमें नागदा-रामगंज मंडी सेक्शन पर 305 ट्रैक किलोमीटर तथा मलारना-पिलोदा सेक्शन पर नए 100 ट्रैक किलोमीटर सम्मिलित हैं।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2025-26 के लिए 396 ट्रैक किलोमीटर का लक्ष्य निर्धारित था, जिसे कोटा मंडल ने न केवल प्राप्त किया, बल्कि 9 ट्रैक किलोमीटर अधिक की उपलब्धि हासिल की।
श्री जैन ने बताया कि यह तकनीकी उन्नयन सीधे तौर पर यात्रियों के दैनिक सफर को बेहतर बनाएगा। कोटा, गंगापुर सिटी, सवाई माधोपुर एवं आसपास के क्षेत्रों से प्रतिदिन हज़ारों यात्री जिनमें व्यापारी, विद्यार्थी, नौकरीपेशा एवं तीर्थयात्री सम्मिलित हैं, इस रेलखंड पर यात्रा करते हैं। उन्नत विद्युत आपूर्ति से ट्रेनों की गति बढ़ेगी, देरी में कमी आएगी तथा बिजली व्यवधान के कारण होने वाली परेशानियों से यात्रियों को राहत मिलेगी।
2×25 केवी विद्युत प्रणाली, परम्परागत 25 केवी प्रणाली की तुलना में अधिक उन्नत तकनीक है। इस प्रणाली में ओवरहेड लाइन के साथ-साथ एक अतिरिक्त फीडर लाइन भी लगाई जाती है, जिससे विद्युत आपूर्ति की गुणवत्ता और विश्वसनीयता में उल्लेखनीय सुधार होता है। यह प्रणाली विशेष रूप से उच्च गति रेल संचालन हेतु अनिवार्य मानी जाती है।

