कोटा मंडल ने रचा इतिहास, देश का पहला कवच वर्जन 4.0 कॉरिडोर हुआ चालू

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मथुरा–नागदा रेलखंड पर स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली कवच 4.0 का संचालन

कोटा। नवाचार पर आधारित तकनीकी दिशा-निर्देशों के अनुरूप, पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा मंडल ने रेलवे सुरक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है।

नई दिल्ली–मुंबई मुख्य रेलमार्ग के मथुरा से नागदा के बीच 549 किलोमीटर लंबे रेलखंड पर भारतीय रेल की स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली “कवच संस्करण 4.0” का सफलतापूर्वक कमीशनिंग पूरा किया गया है। इस परियोजना के पूर्ण होते ही कोटा मंडल मानवीय भूल से होने वाली दुर्घटनाओं से पूरी तरह सुरक्षित हो गया है।

पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा मंडल में स्वदेशी रूप से विकसित स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली “कवच संस्करण 4.0” (ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन – एटीपी) का सफल कमीशनिंग पूरा किया गया है।

यह प्रणाली अब नई दिल्ली–मुंबई मुख्य रेलमार्ग के मथुरा से नागदा (कुल 549 किलोमीटर) लंबे खंड पर पूर्ण रूप से चालू हो चुकी है। इसके साथ ही कोटा मंडल भारतीय रेल का पहला ऐसा मंडल बन गया है जिसने पूरे खंड पर “कवच 4.0” प्रणाली को सफलतापूर्वक लागू किया है।

रिकॉर्ड समय में कार्यान्वयन
कवच प्रणाली का पहला चरण मथुरा–कोटा खंड (324 किमी) पर 30 जुलाई 2025 को सफलतापूर्वक कमीशन किया गया था, जो भारत का पहला “कवच 4.0” खंड बना। इसके बाद कोटा–नागदा खंड (225 किमी) पर 27 अक्तूबर 2025 को कार्य पूर्ण हुआ। इस प्रकार सम्पूर्ण मथुरा–नागदा (549 किमी) खंड पर अब “कवच 4.0” प्रणाली पूर्णत: क्रियाशील हो गई है। इस मार्ग पर सुचारू संचालन हेतु 87 डब्ल्यूएपी-7 इंजनों को ऑन-बोर्ड कवच उपकरणों से लैस किया गया है। इससे ट्रेन संचालन में निर्बाधता, दक्षता एवं सुरक्षा में अत्यधिक वृद्धि हुई है।

कवच 4.0: स्वदेशी तकनीक से सुसज्जित उन्नत सुरक्षा प्रणाली
कवच 4.0 एक अत्याधुनिक स्वदेशी तकनीक है जो मानवीय त्रुटियों से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने में सक्षम है। यह प्रणाली ट्रेन की गति की निरंतर निगरानी करती है और सिग्नल पास्ड एट डेंजर (एसपीएडी), हेड-ऑन या रियर-एंड टक्कर जैसी स्थितियों में स्वतः ब्रेक लगाकर ट्रेन को रोक देती है।

प्रमुख विशेषताएं

  • लोको पायलट को इंजन के भीतर ही अगले सिग्नल की जानकारी कैब-डिस्प्ले के माध्यम से मिलती है, जिससे कोहरे या दृश्यता कम होने पर भी सुरक्षित संचालन संभव है।
  • यह मूवमेंट-अथॉरिटी (एम-ए) प्रदान करती है, जिससे ट्रेन को केवल सुरक्षित दूरी तक चलने की अनुमति मिलती है।
  • यदि ट्रेन अनजाने में पीछे की ओर सरकती है तो यह स्वतः ब्रेक लगाकर उसे रोक देती है।
  • लेवल-क्रॉसिंग से लगभग 600 मीटर पहले स्वतः हॉर्न बजाकर सड़क उपयोगकर्ताओं को सतर्क करती है।
  • आपात स्थिति में लोको पायलट और स्टेशन मास्टर के बीच इंस्टैंट-कम्युनिकेशन की सुविधा देती है।

‘मेक इन इंडिया’ को सशक्त बनाती स्वदेशी पहल
कवच प्रणाली को पूर्णतः भारतीय इंजीनियरों द्वारा विकसित किया गया है और इसके उपकरण देश के स्वीकृत निर्माताओं द्वारा बनाए जा रहे हैं। यह ‘मेक इन इंडिया’ पहल को प्रोत्साहित करती है और घरेलू उद्योगों में तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देती है।

कवच प्रणाली की इंटर-ऑपरेबिलिटी (परस्पर संगतता) सुनिश्चित की गई है, जिससे विभिन्न निर्माताओं के उपकरण आपस में सहजता से कार्य कर सकते हैं। यूरोपीय सुरक्षा एजेंसी एम/एस इटालसर्टिफर द्वारा 160 किलोमीटर प्रति घंटे की गति पर किए गए स्वतंत्र परीक्षणों में कवच प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप प्रमाणित किया गया है।

भारतीय रेल के लिए नया युग
मथुरा–नागदा खंड पर कवच 4.0 का पूर्ण कमीशनिंग भारतीय रेल के इतिहास में एक मील का पत्थर है। यह उपलब्धि न केवल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है, बल्कि भारत को उन देशों की श्रेणी में खड़ा करती है जहाँ उच्च गति वाली ट्रेनों के लिए अत्याधुनिक स्वदेशी सुरक्षा प्रणाली सफलतापूर्वक लागू की गई है।

कवच 4.0 का यह सफल कार्यान्वयन भारतीय रेल की ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में निर्णायक उपलब्धि है और भविष्य में 160 किमी प्रति घंटे तक की गति से सुरक्षित ट्रेन परिचालन के लिए ठोस आधार तैयार करता है।