कोई देश पाकिस्तान को कर्ज नहीं देता, खुद पाक पीएम ने सुनाया दुखड़ा

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नई दिल्ली। Pakistan PM Shahbaz Sharif: पाकिस्तान और कर्ज पिछले कई दशकों से चली आ रही इस प्रेम कहानी की असलियत अब पाक प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने खोलकर रख दी है।

उन्होंने साफ तौर पर यह स्वीकार किया है कि कैसे वह और पाकिस्तानी सेना के चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर दूसरे देशों में जाकर कर्ज के लिए गिड़गिड़ाते हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो में शरीफ बताते हैं कि कैसे आईएमएफ के पैकेज के लिए भी उन्हें शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा था। पाक पीएम का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 1 अरब डॉलर की फीस वाले पीस बोर्ड में शामिल होने की हामी भर चुके हैं।

पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस्लामाबाद में एक कार्यक्रम के दौरान अपना दुखड़ा जनता को सुनाया। उन्होंने वर्तमान में पाकिस्तान की थोड़ी ठीक होती आर्थिक हालात का हवाला देते हुए कहा, “मैं उन देशों का आभारी हूं, जिन्होंने हमारी मदद की है, लेकिन आप जानते हैं कि जो भी कर्ज लेता है, उससे जुड़ी कुछ जिम्मेदारियां भी होती हैं।

मैं आपको किस तरह यह बताऊं कि कैसे हमने इन दोस्त देशों से जाकर कर्ज मांगा। मैं और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने भी चुपचाप मेरे साथ जाकर उन देशों को पाकिस्तान के हालात और आईएमएफ के प्रोग्राम के बारे में जानकारी दी। फिर उनसे कई बिलियन डॉलर कर्ज की मांग की। आप सभी जानते हैं, जो कर्ज लेने जाता है। उसका सिर झुका हुआ होता है।”

शरीफ ने कहा, “आप सभी जानते हैं कि जब एक बार आप कर्ज लेते हैं, तो कई बार इन देशों की भी कुछ मांगे होती हैं, आपको अपनी इज्जत रखकर कर्ज लेना होता है। ऐसे में कई बार आपको उन देशों की कई बातों को भी मानना होता है।”

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने बताया कि मुश्किल वक्त में उनकी सबसे ज्यादा मदद चीन ने की है। उन्होंने कहा, “चीन ने सबसे मुश्किल समय में हमारी मदद की, इसके अलावा सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कतर ने भी सहयोग दिया। इसी तरह यह कार्यक्रम तैयार किया गया।”

दी इज्जत की दुहाई
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने आईएमएफ की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीएवा के साथ हुई एक बैठक का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, “पिछले प्रोग्रामों के दौरान काफी गलतियां हुई थीं, जिसकी वजह से उन्होंने मुझसे कहा कि समय खत्म हो गया है और अब वह हमें नया प्रोग्राम नहीं दे सकतीं।

उस वक्त मैंने उनसे कहा कि मैं आपको इज्जत की कसम देता हूं कि हम समझौते का अक्षरशः पालन करेंगे और जैसा आप कहेंगी वैसा ही उसे लागू करेंगे। इसके बाद जब मैं वापस पाकिस्तान लौटा, तो उन्होंने मुझे फोन करके कहा कि हमारी टीम आपके साथ बैठेगी और आपको समझौते की शर्तें पूरी करनी होगी। इस तरह से पाकिस्तान डिफॉल्ट होने से बच सका है।