नई दिल्ली। 8th Pay Commission: केंद्र सरकार हर 10 साल में केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के वेतन, भत्तों और पेंशन की समीक्षा करती है। 7वां वेतन आयोग 31 दिसंबर 2025 को खत्म हो रहा है और 8वां वेतन आयोग 1 जनवरी 2026 से लागू माना जाएगा।
हालांकि सरकार ने नवंबर 2025 में 8वें वेतन आयोग के टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) को मंजूरी दे दी है, लेकिन आयोग को अपनी सिफारिशें देने में करीब 18 महीने लग सकते हैं। ऐसे में तब तक, यानी जब तक कैबिनेट नई सिफारिशों को मंजूरी नहीं दे देती, कर्मचारियों को 7वें वेतन आयोग के हिसाब से ही सैलरी मिलती रहेगी।
इस बीच कर्मचारियों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि ट्रांजिशन पीरियड में सैलरी और डीए (महंगाई भत्ता) का क्या होगा। पुराने अनुभव को देखें तो जब भी नया वेतन आयोग लागू होता है, सरकार बीच के पूरे समय का एरियर देती है।
इसमें बढ़ा हुआ बेसिक पे, भत्ते और रिटायरमेंट से जुड़े लाभ शामिल होते हैं। यह सब नए फिटमेंट फैक्टर के आधार पर कैलकुलेट किया जाता है। यानी 8वां वेतन आयोग लागू होने के बाद कर्मचारियों को एकमुश्त अच्छा-खासा एरियर मिलने की उम्मीद रहती है।
डीए को लेकर चिंता इसलिए ज्यादा है क्योंकि नया वेतन आयोग लागू होते ही जमा हुआ पूरा डीए बेसिक में मर्ज कर दिया जाता है और डीए शून्य (0) से दोबारा शुरू होता है। अभी डीए 1 जुलाई 2025 से 58% हो चुका है और अगली बढ़ोतरी 1 जनवरी 2026 से होनी है।
मौजूदा नियमों के मुताबिक, जब तक नया वेतन आयोग लागू नहीं होता, तब तक हर छह महीने में डीए बढ़ता रहेगा। लेकिन जैसे ही फिटमेंट फैक्टर लागू होगा, पूरा डीए बेसिक में जुड़ जाएगा और फिर नए बेसिक पर डीए की गिनती नए सिरे से शुरू होगी।
इस बीच कर्मचारी संगठनों ने एक वैकल्पिक सुझाव भी दिया है। ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लॉयीज फेडरेशन के अध्यक्ष मनजीत सिंह पटेल का कहना है कि अगर जनवरी 2028 तक डीए करीब 74% पहुंच जाता है, तो सरकार पूरा डीए खत्म करने के बजाय 50% डीए बेसिक में मर्ज करे और बाकी 24% डीए को जारी रखे।
इससे महंगाई के दौर में कर्मचारियों की जेब पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। साथ ही उन्होंने फिटमेंट फैक्टर 2.64 रखने और न्यूनतम वेतन तय करते समय परिवार की यूनिट तीन से बढ़ाकर पांच करने की भी मांग की है। अब देखना यह है कि सरकार पुराने फॉर्मूले पर चलती है या कर्मचारियों के लिए कोई बीच का रास्ता निकालती है।

