कलेक्टर और आरटीओ से किया जवाब-तलब, याचिका पर सुनवाई 15 जनवरी को
कोटा। शहर में प्री-पेड बूथ व्यवस्था को प्रारंभ कर लोगों और यात्रियों को इसका लाभ पहुंचाने व शहर में चल रहे ऑटो का किराया दर सार्वजनिक रूप से तय करने का मामला स्थाई लोक अदालत में पहुंच गया है।
इस पर लोक अदालत ने जिला कलेक्टर और प्रादेशिक परिवहन अधिकारी को नोटिस जारी कर उनसे जवाब-तलब किया है। याचिका पर सुनवाई 15 जनवरी को होगी।
वकील लोकेश कुमार सैनी, पत्रकार जगदीश अरविंद एवं धर्म बन्धु आर्य ने जिला कलेक्टर और प्रादेशिक परिवहन अधिकारी कोटा को पार्टी बनाते हुए 17 दिसंबर को स्थाई लोक अदालत में जनहित याचिका पेश की है जिसमें कहा कि यात्रियों की सुविधा व किराये में पारदर्शिता लाने के लिये कोटा शहर में प्रारंभ की गई प्री-पेड बूथ व्यवस्था पूर्ण रूप से बेकार हो चुकी है।
रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और राजीव गांधी नगर में यह सेवा सरकार के निर्देश पर इसलिये लागू की गई थी। ताकि यात्रियों से तय दर पर ही किराया लिया जावे और ऑटो चालकों की मनमानी पर रोक लगे।
परन्तु प्रशासनिक की उदासीनता और नियमित निगरानी के अभाव में यह व्यवस्था धीरे-धीरे समाप्त हो चुकी है। वर्तमान में कोटा शहर में कहीं भी प्री-पेड बूथ सकिय नहीं है।
याचिकाकर्ताओं ने बताया कि शहर में प्री-पेड बूथ व्यवस्था साल 2015-16 में प्रारंभ की गई थी। सबसे पहले इसका सेट-अप कोटा जंक्शन पर किया गया था। जहां यात्री टिकिट काउंटर से निर्धारित किराया देकर ऑटो ले सकते थे। इसके बाद यह सेवा रोड़वेज बस स्टैंड नयापुरा और राजीव गांधी नगर में भी प्रारंभ की गई थी।
प्रारंभिक दिनों में उक्त बूथों का सकारात्मक प्रभाव रहा। किराया-तय-होने से यात्रियों को लाभ भी मिला, विवाद कम हुए और ऑटो चालकों की मनमानी पर नियंत्रण रहा। परन्तु समय के साथ उक्त बूथों का संचालन बेकार हो गया।
आरटीओ और यातायात पुलिस की ओर से पर्याप्त स्टाफ भी उपलब्ध नहीं कराया गया और न ही सुरक्षा व मोनिटरिंग की व्यवस्था की गई और धीरे-धीरे उक्त बूथ केवल औपचारिकता बनकर रह गये और अंततः पूरी तरह बन्द हो गये हैं।

