एआई के बुनियादी ढांचे के लिए अगले 7 साल में 10 लाख करोड़ का निवेश: अंबानी

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नई दिल्ली। India AI Impact Summit 2026: रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने गुरुवार को भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बुनियादी ढांचे और सर्विसेज तैयार करने के लिए अगले सात वर्षों में 10 लाख करोड़ रुपये के निवेश का एलान किया।

अंबानी ने नई दिल्ली में चल रहे एआई इम्पैक्ट समिट में कहा कि एआई का सबसे अच्छा दौर अभी आना बाकी है और यह तकनीक दुनिया में ‘सुपर अबंडेंस’ यानी बहुत ज्यादा उपलब्धता और समृद्धि का नया दौर ला सकती है। उन्होंने कहा कि दुनिया में इस बात पर बहस चल रही है कि एआई से ताकत कुछ गिने-चुने लोगों के हाथ में सिमट जाएगी, या फिर यह सबको बराबर मौके देगा।

मुकेश अंबानी ने कहा, ”दुनिया आज एआई को लेकर एक बड़े मोड़ पर खड़ी है। एक रास्ता ऐसा है जहां एआई कम उपलब्ध, महंगी होगी और डेटा कुछ लोगों के नियंत्रण में रहेगा। दूसरा रास्ता ऐसा है जहां एआई सस्ती और सबके लिए आसानी से उपलब्ध होगी।”

उन्होंने कहा, ”जियो और रिलायंस मिलकर इस साल से अगले 7 साल में 10 लाख करोड़ रुपये का निवेश करेंगे।” उन्होंने साफ किया कि यह निवेश सिर्फ दिखावे या वैल्यूएशन बढ़ाने के लिए नहीं है। यह देश के निर्माण के लिए धैर्य और अनुशासन के साथ किया जाने वाला निवेश है।

अंबानी ने कहा कि एआई में सबसे बड़ी कमी टैलेंट की नहीं है, बल्कि कंप्यूटिंग (कंप्यूट) की लागत बहुत ज्यादा होना है। उन्होंने कहा, ”जियो इंटेलिजेंस भारत का सॉवरिन कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर बनाएगा।” इसमें गीगावॉट स्तर के बड़े डेटा सेंटर भी शामिल होंगे। अंबानी ने कहा कि जियो ने भारत को इंटरनेट के दौर से जोड़ा था और अब वह भारत को इंटेलिजेंस (एआई) के दौर से जोड़ेगा।

उन्होंने कहा, ”हम हर नागरिक, अर्थव्यवस्था के हर सेक्टर और समाज के हर हिस्से तक एआई की ताकत पहुंचाएंगे। यह काम जियो उसी भरोसे, बड़े पैमाने और बेहद सस्ती कीमत पर करेगा, जैसे उसने मोबाइल डेटा को सस्ता करके कनेक्टिविटी में बदलाव किया था।”

जियो की योजनाओं की रूपरेखा बताते हुए उन्होंने कहा कि कंपनी गीगावाट स्तर के डेटा सेंटर के जरिये भारत का स्वतंत्र कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित करेगी। उन्होंने कहा, ”जामनगर में एक बहु-गीगावाट एआई इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण कार्य पहले ही शुरू हो चुका है। 2026 की दूसरी छमाही में 120 मेगावाट से अधिक क्षमता चालू हो जाएगी और टेस्टिंग के लिए गीगावाट स्तर की क्षमता विकसित करने का रास्ता साफ़ होगा।