वाशिंगटन। ईरान के खिलाफ ब्रिटेन ने अमेरिका को अपने एयरबेस के इस्तेमाल की अनुमति दे दी है, लेकिन इसके बाद भी ट्रंप ने कीर स्टार्मर को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की है।
दरअसल, शुरूआत में ब्रिटेन ने इस क्षेत्र में स्थित अपने बेस का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ करने से इनकार कर दिया था लेकिन रविवार को उन्होंने अमेरिकी सेना को इसके रक्षात्मक इस्तेमाल की अनुमति दे दी। ट्रंप ने बताया कि शुरुआत में जब ब्रिटेन ने अपने बेस का इस्तेमाल करने देने से इनकार कर दिया, तो वह बेहद निराश थे।
टेलीग्राफ को दिए अपने इंटरव्यू में ट्रंप ने ब्रिटिश पीएम पर जमकर अपनी भड़ास निकाली। उन्होंने कहा, “शुरुआत में ब्रिटेन द्वारा चागोस द्वीप के सैन्य अड्डे के उपयोग को लेकर स्टार्मर का इनकार ऐसा था जैसा हमारे देशों के बीच में कभी नहीं हुआ।” हालांकि, जब ट्रंप ने पूछा गया कि अब उन्होंने इसकी अनुमति दे दी है, तो ट्रंप ने कहा कि इसमें बहुत ज्यादा समय लग गया है।
ब्रिटिश अखबार से बता करते हुए ट्रंप ने कहा कि स्टार्मर को शुरुआत से ही शुरुआत से ही हिंद महासागर में स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण अमेरिका-ब्रिटेन के संयुक्त वायुसेना अड्डे डिएगो गार्सिया के उपयोग की अनुमति दे देनी चाहिए थी।
उन्होंने दावा किया कि ईरान “आपके देश के बहुत से लोगों की मौत के लिए ज़िम्मेदार” है। ट्रंप ने कहा कि अब अमेरिका के लिए डिएगो गार्सिया से सैन्य अभियान शुरू कर पाना “उपयोगी” होगा। इसके साथ ही उन्होंने साथ ही चागोस द्वीपसमूह की संप्रभुता को लेकर स्टार्मर द्वारा किए गए समझौते की भी आलोचना की, जहां डिएगो गार्सिया स्थित है।
हिंद महासागर के बीच स्थित चागोस द्वीप समूह लगभग 60 द्वीपों और 7 एटोल का समूह है। यह मुख्यतः मॉरीशस का क्षेत्र है, लेकिन ब्रिटेन ने इस पर अभी तक कब्जा बनाया हुआ था। मई 2025 में हुए एक समझौते में ब्रिटेन ने चागोस द्वीप समूह की संप्रभुता मॉरीशस को सौंप दी, हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने डिएगो गार्सिया पर स्थिति यूके और यूएस के सैन्य अड्डों के लिए 99 साल की लीज बढ़ा दी थी।
इस अड्डे का इस्तेमाल ऐतिहासिक रूप से अमेरिका और ब्रिटेन द्वारा अफगानिस्तान युद्ध के लिए किया गया था। हालांकि, ब्रिटेन ने भले ही इस द्वीप को लेकर मॉरीशस के साथ समझौता कर लिया हो, लेकिन ट्रंप ने इस समझौते का खुला विरोध किया था।
ईरान पर हमले में ब्रिटेन की भूमिका नहीं
ब्रिटेन 28 फरवरी को ईरान पर हुए हमलों में शामिल नहीं है। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई की मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद से ईरान लगातार क्षेत्र में मौजूद अमेरिका और यूरोपीय देशों के ठिकानों पर हमले करने लगा। इन हमलों में अमेरिका का काफी हद तक नुकसान हुआ। इसके बाद पहले अमेरिका को एयरबेस से इनकार कर चुके ब्रिटेन ने रक्षात्मक उपयोग के लिए इनके इस्तेमाल की इजाजत दे दी।

