ईरान पर अमेरिकी हमले की सबसे बड़ी कीमत पाकिस्तान चुकाएगा, जानिए कैसे

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इस्लामाबाद। ईरान और अमेरिका के तनातनी पर इस समय दुनिया की नजर लगी हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान पर सैन्य हमले के संकेत ने कई देशों की चिंता को बढ़ाया हुआ है। अमेरिका के ईरान पर संभावित हमले का डर तेहरान के खामेनेई शासन के साथ-साथ सऊदी अरब और कतर जैसे अरब देशों को है।

इन देशों को पूरे क्षेत्र में अराजकता फैलने का अंदेशा है। वहीं इन देशों से ज्यादा फिक्र ईरान के एक और पड़ोसी पाकिस्तान को है। पाकिस्तान वह देश है, जिसे ईरान-अमेरिका के टकराव में सबसे ज्यादा नुकसान होने का अंदेशा है।

यूरेशियन टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान पर अमेरिकी हमले का खतरा खत्म नहीं हुआ है। ट्रंप की बयानबाजी में कमी आई है लेकिन अमेरिकी जंगी जहाजों के ईरान के आसपास के क्षेत्र में जाने से जुड़ी रिपोर्ट ने अमेरिका के संभावित हमले को लेकर आशंका पैदा की है।

पाकिस्तान को ईरान में हमले के बाद अपनी सीमाओं पर उथल-पुथल समेत कई डर सता रहे हैं। ऐसे में पाकिस्तान फिलहाल ईरान की स्थिति पर नजर जमाए हुए है। पाकिस्तान का मानना है कि स्थिर और शांतिपूर्ण ईरान ही उसके हित में है।

पाकिस्तान की पूर्व राजनयिक और राजनीतिक विश्लेषक मलीहा लोधी ने एएफपी से बात करते हुए कहा कि ईरान पर अमेरिकी सैन्य हमले के पूरे क्षेत्र के लिए खतरनाक परिणाम होंगे। सीमा साझा करने की वजह से पाकिस्तान विशेष रूप से इससे प्रभावित होगा। खासतौर से ईरान सीमा पर बलूचिस्तान में पाकिस्तान के लिए गंभीर सुरक्षा खतरा पैदा होगा।

पाकिस्तान और ईरान 900 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करते हैं। सीमा के दोनों तरफ बलूचों के अलगाववागी गुटों की मौजूदगी रही है। ईरान का बलूच-सिस्तान प्रांत पाकिस्तान के बलूचिस्तान से सटा है।

यह इलाका बलूच अलगाववादियों का घर है, जो पाकिस्तानी सेना और सरकार से लड़ रहे हैं। ईरान में हिंसा पाकिस्तान विरोधी बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) और बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLF) जैसे गुटों को मजबूती दे सकती है।

कुएं और खाई की स्थिति में होगा पाकिस्तान
पाकिस्तान के अमेरिका से दोस्ताना रिश्ते हैं। वहीं ईरान उसका पड़ोसी है और स्थानीय लोगों की भावनाएं अमेरिका के खिलाफ हैं। पाकिस्तान में एक बड़ी शिया आबादी भी रहती है। ऐसे में अमेरिका-ईरान की लड़ाई में पाकिस्तान खुद को एक मुश्किल स्थिति में पा सकता है। अमेरिका को ईरान पर हमला करने के लिए अपने एयरस्पेस देना या मना करना, दोनों ही पाकिस्तान को फंसाएंगे। पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसमें खुद को फंसा पाएगा।

ईरान संकट पर फिलहाल यह साफ नहीं है कि पाकिस्तान खाड़ी देशों की तरह इसे टालने के लिए अमेरिका से लॉबिंग कर रहा है या फिर वह चुप बैठा है। संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत आसिम अहमद ने जरूर स्पष्टता दिखाने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर दूसरे देशों की क्षेत्रीय अखंडता या राजनीतिक स्वतंत्रता के खिलाफ बल के इस्तेमाल या घरेलू अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप पर रोक लगाता है।