ईरान-अमेरिकी युद्ध के बीच भारत को लपेटने लगा पाकिस्तान

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नई दिल्ली। पाकिस्तान अपनी नीच हरकतों से कभी बाज आने वाला नहीं है । इसका ताजा उदाहरण मंगलवार को देखने को मिला। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने मिडिल ईस्ट में चल रही जंग में भारत का नाम भी घसीट लिया।

आसिफ ने कहाकि अगर ईरान में शासन बदलता है, तो इसका साझा सिंगल पॉइंट एजेंडा नई दिल्ली और अफगानिस्तान के साथ पाकिस्तान के प्रति ‘दुश्मनी’ होगा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में आसिफ ने कहाकि एजेंडा यह था कि इजरायल का प्रभाव पाकिस्तान की सीमा तक पहुंचाया जाए।

बता दें कि पाकिस्तान पहले ही भारत पर तालिबान का इस्तेमाल एक प्रॉक्सी के रूप में करने का आरोप लगा रहा है। हालांकि भारत इस दावे से हमेशा इनकार करता रहा है। वहीं, अब आसिफ को डर है कि अगर ईरान में सत्ता परिवर्तन होता है तो पाकिस्तान तीन पड़ोसियों से घिर जाएगा।

आसिफ ने कहाकि अफगानिस्तान, ईरान और भारत का एकमात्र एजेंडा भारत से दुश्मनी निभाना होगा। यह तीनों मिलकर हमारी सीमाओं को असुरक्षित बना देंगे। इस तरह के दुश्मनों से घिरकर पाकिस्तान की हालत कुछ अच्छी नहीं रहेगी।

ख्वाजा आसिफ, अपने भारत-विरोधी भाषणों के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने सभी 2.5 करोड़ पाकिस्तानी नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे दुश्मनों की साजिश और इरादों को समझें। आसिफ ने कहाकि सभी 2.5 करोड़ पाकिस्तानी नागरिकों के लिए यह समझना जरूरी है।

चाहे उनकी राजनीतिक या धार्मिक मान्यताएं जो भी हों, कि वे इस साजिश और हमारे दुश्मनों के इरादों को समझें। यह भी हैरान करने वाली बात है कि पाकिस्तानी रक्षामंत्री यह बयान ऐसे समय आया है, जब पाकिस्तान खुद अफगानिस्तान से युद्ध में उलझा हुआ है।

छह दिन से चल रहा युद्ध
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच शुरू हुई झड़पें मंगलवार को छठवें दिन में प्रवेश कर गई। डूरंड रेखा के पास लगातार संघर्ष जारी है, जिससे सीमा के दोनों ओर रहने वाले आम लोगों में डर बढ़ता जा रहा है। तालिबान की सेना ने 24 फरवरी की शाम को पाकिस्तानी सीमा चौकियों और सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हमले शुरू किए थे। तालिबान का कहना था कि यह कार्रवाई 21 फरवरी को किये गये पाकिस्तानी हवाई हमलों का बदला लेने के लिए की गई है।

बता दें कि पाकिस्तान ने उन हमलों को अफगानिस्तान में मौजूद आतंकी ठिकानों पर की गई कार्रवाई बताया था, लेकिन संयुक्त राष्ट्र ने बाद में पुष्टि की कि उन हमलों में आम नागरिक भी मारे गए थे, जिससे लोगों में भारी गुस्सा फैल गया। पाकिस्तान ने तालिबान के इन हमलों को ‘गलत फैसला’ बताते हुए काबुल को गंभीर नतीजे भुगतने की चेतावनी दी थी।