इंदौर। नगर निगम की बजट बैठक में कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम ने ‘वंदे मातरम्’ गाने से इनकार कर दिया। पार्षद फौजिया शेख ने इस्लामी मान्यताओं और संवैधानिक स्वतंत्रता का हवाला देते हुए ‘वंदे मातरम्’ गाने से मना कर दिया। इसको लेकर हंगामा हो गया।
भाजपा पार्षदों ने जमकर नारेबाजी और हंगामा किया। विवाद बढ़ने पर सभापति ने उन्हें सदन से बाहर जाने का निर्देश दिया। फौजिया का आरोप है कि बुनियादी मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए उन्हें मजबूर किया गया। कांग्रेस पार्टी ने इसे पार्षद की व्यक्तिगत राय बताते हुए खुद को विवाद से अलग कर लिया है।
बताया जाता है कि इंदौर नगर निगम की बजट बैठक के दौरान बुधवार को कांग्रेस की एक महिला पार्षद फौजिया शेख ने इस्लामी मान्यताओं का हवाला देते हुए ‘वंदे मातरम्’ गाने से इनकार कर दिया। इससे सत्तारूढ़ भाजपा के पार्षद नाराज हो गए। भाजपा पार्षदों ने सभापति मुन्नालाल यादव की आसंदी के पास पहुंचकर जमकर नारेबाजी की। हंगामे के बीच सभापति ने फौजिया को सदन से बाहर चले जाने के निर्देश दिए।
कांग्रेस पार्षद ने कहा कि उनका धर्म उनको वंदे मातरम् गाने की इजाजत नहीं देता है। उन्होंने कहा कि एक नागरिक के रूप में संविधान ने उन्हें पूरी धार्मिक स्वतंत्रता दी है। ऐसे में कोई भी उनको वंदे मातरम् गाने के लिए मजबूर नहीं कर सकता है। विवाद बढ़ने पर फौजिया ने सफाई दी कि वह राष्ट्रगीत का सम्मान करती हैं और हमेशा करती रहेंगी।
–ताकि वंदे मातरम् नहीं गाना पड़े
कांग्रेस पार्षद ने कहा कि वह नगर निगम की बैठक में गंदे पानी की समस्या पर बात करने के लिए खड़ी हुई थीं लेकिन भाजपा पार्षदों ने मुख्य मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए उनसे पहले वंद मातरम् गाने के लिए कहा। वहीं मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने कांग्रेस पार्षद की ओर से वंदे मातरम् नहीं गाने को अफसोसजनक बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम जान-बूझकर बैठक में देरी से आती हैं ताकि उन्हें सबके साथ राष्ट्र गीत वंदे मातरम् नहीं गाना पड़े।
कांग्रेस ने झाड़ा पल्ला
इस पूरे विवाद पर नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस पार्षद चिंटू चौकसे ने अपना पल्ला झाड़ लिया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् पर फौजिया की निजी राय से पार्टी का कोई लेना-देना नहीं है।

