इंटरनेट से जुड़े कैमरे और वीडियो सर्विलांस पर बैन से ड्रैगन बौखलाया, जानिए क्यों

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बीजिंग। 1 अप्रैल से Hikvision, Dahua और TP-Link जैसी चीनी वीडियो सर्विलांस कंपनियों को भारत में इंटरनेट से जुड़े कैमरे और दूसरे वीडियो सर्विलांस उपकरणों को बेचने से रोक दिया जाएगा। इस कदम पर चीनी सरकारी मीडिया ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

चीनी मीडिया ने विशेषज्ञों के हवाले से इसे साइबर सुरक्षा की आड़ में उठाया गया भेदभावपूर्ण व्यापार संरक्षण उपाय करार दिया है। उनका यह भी आरोप है कि भारत का यह कदम अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों के विपरीत है। चीनी विशेषज्ञों ने यहां तक दावा किया है कि इस फैसले से भारत के बाजार को नुकसान पहुंच सकता है।

सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स में लिखे एक आर्टिकल में कटिंग-एज टेक्नोलॉजी रिसर्च इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर झांग शियाओरोंग ने आरोप लगाया कि भारत के नए नियमों के पीछे कोई उचित तर्क नहीं है और ये लक्षित व्यापार भेदभाव का एक रूप हैं।

झांग ने कहा, “भारत ने राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर चीनी कंपनियों के उत्पादों और चीनी चिपसेट को बिना कोई ठोस सबूत दिए खारिज कर दिया है। यह स्पष्ट रूप से निष्पक्ष व्यापार के सिद्धांतों का उल्लंघन है।”

भारत में चीनी सीसीटीवी पर प्रतिबंध क्यों

  1. भारत ने डिजिटल सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए चीनी ब्रांडों के इंटरनेट-कनेक्टेड सीसीटीवी कैमरों पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है।
  2. इस फैसले से हिकविजन (Hikvision), दहुआ (Dahua) और टीपी-लिंक (TP-Link) जैसे चीनी ब्रांडों के सबसे ज्यादा प्रभावित होने का अनुमान है।
  3. भारत के नए फैसले से चीनी चिपसेट वाले या उनसे बने कैमरे, जो डेटा को विदेशी सर्वर (चीन) पर भेज सकते हैं, उन्हें मंजूरी नहीं मिलेगी।
  4. भारत को आशंका है कि चीनी सीसीटीवी का उपयोग जासूसी के लिए किया जा सकता है। इससे भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो सकता है।

चीनी कंपनियों को भारतीय बाजार से निकालने का दावा
झांग ने यह भी दावा किया कि चीनी सुरक्षा उत्पाद दुनिया भर के कई देशों में व्यापक रूप से स्वीकार्य हैं और नियमों के अनुरूप हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत के एकतरफा प्रतिबंध सुरक्षा मानकों पर आधारित नहीं हैं, बल्कि तकनीकी प्रमाणन की आड़ में एक व्यापार बाधा का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने इसे अत्यधिक बहिष्कारी और राजनीतिक रूप से प्रेरित कदम भी करार दिया। उन्होंने इसे बाजार हिस्सेदारी से चीनी कंपनियों को निकालने का तरीका बताया। झांग ने यह भी कहा कि यह सब भारत के सरकारी हस्तक्षेप और चीनी कंपनियों को जबरदस्ती बाहर निकालने के लिए किया गया है।

भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका जताई
झांग ने दावा किया कि भारत के इस कदम से अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि लंबे समय में घरेलू कंपनियां अस्थायी रूप से ज्यादा बाजार हिस्सेदारी हासिल कर सकती हैं, लेकिन उनके वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से अलग होने से तकनीकी विकास की गति धीमी पड़ सकती है। उन्होंने यह भी दावा किया कि भारतीय कंपनियां हाई-एंड सेगमेंट के लिए अब भी आयात पर ही निर्भर रहेंगी। उन्होंने दावा किया कि इससे भारतीय कंपनियों के आत्मनिर्भर बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा उन्होंने भारतीय सीसीटीवी उत्पादों की विश्वसनीयता पर भी असर पड़ने की आशंका जताई है।