आत्मा की शुद्धि और पवित्रता के बिना जीवन अधूरा है: विभाश्री माताजी

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कोटा। गणिनी प्रमुख आर्यिका विभाश्री माताजी ने शुक्रवार को अपने प्रवचन के दौरान कहा कि मानव जीवन ईश्वर का अनमोल उपहार है और इसका वास्तविक उद्देश्य आत्मकल्याण की ओर अग्रसर होना है। उन्होंने बताया कि तप, संयम और सदाचार ही जीवन को सार्थक बनाते हैं।

माताजी ने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मनुष्य सुख की तलाश में भौतिक साधनों का सहारा लेता है, परंतु वास्तविक सुख आत्मा के भीतर ही है। आत्मा की शुद्धि और पवित्रता के बिना जीवन अधूरा है।

उन्होंने समझाया कि मनुष्य को क्रोध, लोभ, मोह, मद और माया जैसे पांच पापों से दूर रहकर पंच परमेष्ठी की शरण में रहना चाहिए। चातुर्मास समिति कार्यध्यक्ष मनोज जैसवाल ने बताया कि आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

मंगल विहार आज
चातुमार्स समिति के महामंत्री राजेन्द्र गोधा ने बताया कि गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी एवं विनयश्री माताजी ससंघ का विहार 4 अक्टूबर, शनिवार को विज्ञान नगर जैन मंदिर से प्रारंभ होकर ऋद्धि सिद्धि नगर स्थित ऋद्धि सिद्धि जैन मंदिर तक होगा। गणिनी आर्यिका श्री ससंघ 4 से 5 अक्टूबर तक ऋद्धि सिद्धि जैन मंदिर में विराजमान रहेंगी, जहाँ श्रद्धालु उनके सानिध्य में धर्मलाभ प्राप्त करेंगे। माताजी के पावन सानिध्य में 4 अक्टूबर को दोपहर 12:15 बजे ऋद्धि सिद्धि जैन मंदिर में श्री कल्याण मंदिर विधान का आयोजन होगा। समिति ने समाज के सभी धर्मप्रेमियों से इस आयोजन में सम्मिलित होकर पुण्य लाभ अर्जित करने का आह्वान किया है।