कोटा। आचार्य विद्यासागर महाराज का द्वितीय समाधि दिवस महोत्सव रिद्धि सिद्धि नगर जैन मंदिर में श्रद्धा एवं भक्ति भाव से मनाया गया।
मंदिर अध्यक्ष राजेन्द्र गोधा एवं मंत्री पंकज खटोड़ ने बताया कि यह आयोजन आचार्य समयसागर महाराज के आशीर्वाद तथा मुनि योगसागर महाराज के सानिध्य में सम्पन्न हुआ। रिद्धि सिद्धि जैन मंदिर में आचार्य श्री का संगीतमय पूजन, विनयांजलि सभा एवं संगीतमय महाआरती आयोजित की गई। इसके उपरांत विशेष थाल सजाकर अष्ट द्रव्य से पूजन किया गया।
विनयांजलि सभा में योगसागर महाराज ने कहा कि आचार्य विद्यासागर महाराज में मात्र 9 वर्ष की आयु में आचार्य शांतिसागर महाराज के दर्शन एवं प्रवचन सुनने के बाद वैराग्य की प्रबल भावना जागृत हुई थी।
बाल्यकाल में ही उनके मन में धर्म और आत्मा के प्रति गहन जिज्ञासा उत्पन्न हो गई थी, जिससे लौकिक शिक्षा में उनका मन नहीं लगा। वे अन्य बच्चों की भांति खेलकूद में न लगकर मंदिरों में प्रवचन एवं चिंतन में लीन रहने लगे।
उसी समय उन्होंने बाल ब्रह्मचर्य धारण कर आगे चलकर पूर्ण वैराग्य ग्रहण करने का दृढ़ संकल्प लिया। बाद में वे पदयात्री बनकर गुरु ज्ञानसागर महाराज के पास पहुंचे और वैराग्य जीवन का प्रारंभ किया।
गणिनी आर्यिकाप्रशममति माताजी ने कहा कि आचार्य श्री के प्रति बच्चों में भी गहरी श्रद्धा विद्यमान है। बच्चे विश्वास से कहते हैं कि यदि वे बीमार हों और आचार्य श्री का नाम लें तो वे स्वस्थ हो जाएंगे।
सभा में मुनि निरोगसागर, मुनि निर्मोहसागर, मुनि निरामयसागर एवं मुनि निर्भीकसागर ने भी अपने अनुभव साझा किए। निर्मोहसागर महाराज ने कहा कि “आचार्य श्री साधना के हिमालय थे। जिसके जीवन में गुरु नहीं, उसका जीवन प्रारंभ नहीं।” उन्होंने कहा कि गुरु मिट्टी को सोना बना देते हैं और गुरु के प्रति सच्ची श्रद्धा ही जीवन का मार्ग प्रशस्त करती है।
मुनि निरोगसागर जी ने कहा कि “यदि जीवन भी लगा दें तो आचार्य श्री के गुणों की पूर्ण माला नहीं लिख सकते। वे शारीरिक रूप से भले ही हमारे बीच नहीं हैं, पर आत्मिक रूप से सदैव जुड़े रहेंगे।”
मुनि योगसागर जी महाराज ने कहा कि उन्हें अत्यंत हर्ष है कि वे आचार्य परंपरा में साधु बने। उन्होंने बताया कि बाल्यावस्था में ही आचार्य श्री ने उन्हें नमोकार मंत्र सिखाया था और पिछले 65 वर्षों से वे उनके धर्मगुरु रहे। उन्होंने कहा कि आत्मकल्याण गुरु आज्ञा के पालन में निहित है।
इस अवसर पर सकल समाज के अध्यक्ष प्रकाश बज ने विनयांजलि अर्पित करते हुए कहा कि गुरु की प्रसन्न मुद्रा मात्र से लोगों के कष्ट दूर हो जाते थे। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि आचार्य विद्यासागर महाराज को भारत रत्न से सम्मानित किया जाए। कार्यक्रम का संचालन संजय सांवला ने किया।

