नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने शुक्रवार को साफ किया कि पाकिस्तान विस्तारित निधि सुविधा के तहत अपने केंद्रीय बैंक को मिली वित्तीय सहायता को इसके लिए तय कार्यक्रम से इतर इस्तेमाल को मंजूरी नहीं दे सकता।
आईएमएफ के अनुसार, इसके साथ ही अनधिकृत सरकारी संवितरण या उधार सहित दुरुपयोग को रोकने के लिए सुरक्षा उपाय भी किए गए हैं। आईएमएफ की ओर से यह स्पष्टीकरण ऐसे मौके पर आया, जब भारत की ओर से वैश्विक एजेंसी से पाकिस्तान को फंडिंग दिए जाने पर बात करने की खबरें आ रही हैं।
संचार प्रमुख जूली कोजैक ने गुरुवार को संवाददाताओं को बताया कि आईएमएफ का वित्तपोषण स्पष्ट रूप से भुगतान संतुलन की समस्याओं के समाधान के लिए है। इसमें स्थापित कार्यक्रम शर्तों से विचलन की स्थिति में राजकोषीय प्रबंधन में सुधार करने जैसी संरचनात्मक शर्तें शामिल हैं। एजेंसी के अनुसार ये शर्तें भविष्य की समीक्षाओं को प्रभावित करेगा।
उन्होंने आईएमएफ की उस प्रोटोकॉल की ओर भी इशारा किया, जिसके तहत कार्यकारी बोर्ड ‘ऋण कार्यक्रमों की समय-समय पर समीक्षा करता है… ताकि यह पता लगाया जा सके कि इसे वापस पटरी पर लाने के लिए नीतिगत बदलावों की जरूरत है या नहीं।’ कोजैक ने कहा,” हमारे बोर्ड ने पाया कि पाकिस्तान ने वास्तव में सभी लक्ष्य हासिल कर लिए हैं। उसने कुछ सुधारों पर प्रगति की है, और इसी कारण से बोर्ड ने आगे बढ़कर कार्यक्रम को मंजूरी दे दी।”
आईएमएफ की ओर से भुगतान की निगरानी पर स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया है, जब भारत ने इस बात पर चिंता जताई है कि अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां पहलगाम आतंकी हमले और उसके बाद पाकिस्तानी सेना की ओर से सैन्य कार्रवाई में वृद्धि के बावजूद पाकिस्तान को अरबों डॉलर की वित्तीय सहायता दे रही है।
सूत्रों ने बताया कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आईएमएफ की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा से सीधे बात की और उनसे पाकिस्तान को किसी भी तरह की वित्तीय सहायता मंजूर न करने का आग्रह किया। बातचीत के दौरान जॉर्जीवा को बताया गया कि भारत किसी भी देश को वित्तीय सहायता प्रदान करने के विरुद्ध नहीं है, लेकिन उन्होंने इन सहायताओं के समय पर सवाल उठाया। इसमें पहली सहायता उस समय दी गई थी, जब पाकिस्तानी सेना पश्चिमी भारत में सैन्य और नागरिक केंद्रों पर ड्रोन और मिसाइलें दाग रही थी।
सूत्रों के अनुसार भारत ने आईएमएफ को बताया है कि पिछले वर्षों के आंकड़ों से पता चलता है कि सहायता प्राप्त करने के बाद पाकिस्तान की हथियार खरीद में वृद्धि हुई है। हालांकि, आईएमएफ ने बताया है कि उसके बोर्ड ने सितंबर 2024 में ईएफएफ को मंजूरी दे दी थी और पहलगाम हमले से एक महीने पहले मार्च 2025 में पहली प्रगति समीक्षा की थी। और, “उस समीक्षा के पूरा होने के परिणामस्वरूप, पाकिस्तान को उस समय (यानी 9 मई) को यह राशि मिली”।
इस बीच, भारत सरकार की ओर से विश्व बैंक से संपर्क किए जाने की खबरें हैं। इसमें 10 साल के लिए 20 बिलियन डॉलर के ऋण को तेजी से आगे बढ़ाने की बात कही गई है। सूत्रों ने बताया कि सरकार पाकिस्तान को फिर से अपनी ‘ग्रे लिस्ट’ में डालने के लिए आतंकवाद के वित्तपोषण पर नजर रखने वाली संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स से भी बात करेगी।

