आंतरिक विकारों का त्याग ही वास्तविक धर्म है: आचार्य प्रज्ञासागर महाराज

0
10

कोटा। आचार्य प्रज्ञासागर महाराज ने गुरुवार को ‘दशलक्षण धर्म’ के अंतर्गत उत्तम त्याग दिवस पर प्रवचन देते हुए कहा कि त्याग का अर्थ केवल वस्तुओं का परित्याग नहीं है, बल्कि आत्मशुद्धि की दिशा में राग-द्वेष, क्रोध और अहंकार जैसे आंतरिक विकारों का त्याग करना ही वास्तविक धर्म है।

आचार्य ने कहा कि सम्यग्दर्शन के साथ ‘मेरा’ भाव का त्याग करना ही उत्तम त्याग धर्म है। जिन वस्तुओं में ‘मेरा’ का भाव हो, जब उनका सम्यक रूप से त्याग किया जाता है, वहीं से जीवन की वास्तविक आध्यात्मिक यात्रा आरंभ होती है।

उन्होंने समझाया कि वस्तु, भाव और मन की शुद्धि, मोह का निष्कासन और आत्मा की मुक्ति की दिशा में त्याग ही सर्वोत्तम साधन है। दान पुण्य का द्वार है, लेकिन त्याग मोक्ष का द्वार खोलता है।