अमेरिकी धमकी से भारत में सूखे मेवों का कारोबार प्रभावित होने की आशंका

0
3

नई दिल्ली। अमरीकी प्रशासन ने कहा है कि ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों के उत्पादों पर अमरीका में 25 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा। इससे पूर्व अमरीका रूस के साथ कारोबार करने वाले देशों के उत्पादों पर 500 प्रतिशत का टैरिफ लगाने की धमकी दे चुका है।

भारत इन दोनों देशों के साथ अच्छा कारोबार करता है। भारतीय उत्पादों पर अमरीका में 50 प्रतिशत का आयात शुल्क पहले से ही लगा हुआ है और यदि ये दोनों अतिरिक्त शुल्क भी लागू हो गए तो कुल प्रभावी टैरिफ का स्तर बढ़कर 575 प्रतिशत पर पहुंच जाएगा और इसके परिणामस्वरूप अमरिएक में अधिकांश भारतीय उत्पादों का निर्यात पूरी तरह ठप्प पड़ सकता है।

हालांकि ईरान के साथ कारोबार बंद होने की स्थिति में तजा फल मंगाने वाले भारतीय आयातकों को ज्यादा परेशानी नहीं होगी क्योंकि वे अन्य देशों से सेब, चेरी एवं कीवी आदि का आयात जारी रख सकते हैं लेकिन सूखा मेवा उद्योग का कारोबार काफी हद तक प्रभावित हो सकता है।

दिल्ली स्थित फ्रेश फ्रूट्स इम्पोर्टर्स एसोसिएशन के अनुसार जब तक इसकी अनुमति रहेगी और सरकार कोई नियंत्रण नहीं लगाती है तब तक चिंता की कोई बात नहीं है लेकिन जब परिवहन (आयात) में बाधा उत्पन्न होगी तब मामला गंभीर हो सकता है। समझा जाता है कि अमरीकी टैरिफ के जवाब में भारत सरकार भी कुछ कदम उठा सकती है।

वर्तमान समय में ईरान के चाबहार बंदरगाह से आयात-निर्यात को बंद कर दिया गया है इसलिए बंदर अब्बास पोर्ट के माध्यम से कारोबार किया जा रहा है। जानकार सूत्रों ताजे फलों के भारतीय निर्यात का प्रबंधन कुछ हद तक उन कंपनियों द्वारा किया जाता है जो कुछ वस्तु विनिमय जैसी व्यवस्था के साथ ईरानी भागीदारों से भुगतान का प्रबंध करने में सक्षम है।

लेकिन इसके विपरीत सूखे मेवा क्षेत्र पर टैरिफ का गहरा असर पड़ सकता है। नट्स एंड ड्राई फ्रूट्स कौंसिल (इंडिया) के अनुसार ईरान में न केवल अराजकता और अशांति है बल्कि उसकी आर्थिक स्थिति भी बहुत कमजोर हो गई है जिससे वहां सूखे-मेवों और खासकर पिस्ता, खजूर (छुहारा), केसर, बादाम और मुनक्का के उत्पादकों एवं निर्यातकों को भारी कठिनाई हो रही है।

वहां से भारत में इसका आयात बाधित हो सकता है। अगर भारत सरकार ने ईरान के साथ कारोबार रोकने का निर्णय लिया तो वहां से प्रत्यक्ष तौर पर उपरोक्त सूखे मेवों का आयात ठप्प पड़ सकता है। लेकिन अभी ऐसा कोई निर्णय नहीं हुआ है।