अफीम औषधीय पौधा, इसे नशे से जोड़ना दुर्भाग्यपूर्ण, भारतीय किसान संघ

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    कोटा। अफीम नीति निर्धारण के लिए शनिवार को आयोजित सलाहकार समिति की बैठक में भारतीय किसान संघ की ओर से अफीम उत्पादकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया। भारतीय किसान संघ की ओर से प्रान्त युवा प्रमुख पुष्कर शर्मा ने किसानों के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।

    उन्होंने कहा कि किसानों को सरकार चोर समझना बंद करे। जिस प्रकार विभिन्न उपज हर साल एक जैसी नहीं होती तो फिर अफीम की खेती में हर साल एक ही तरह का होने कह उम्मीद कैसे की जा सकती है। एक साल उपज में कमी के आधार पर पट्टा निरस्त नहीं होना चाहिए। किसान भूखा रह सकता है लेकिन कभी भी चोरी नहीं कर सकता है।

    उन्होंने कहा कि नारकोटिक्स विभाग में विभिन्न स्तरों पर भ्रष्टाचार है, जिसकी जांच करके दूर करना चाहिए। प्रतिनिधिमंडल ने किसानों को ज्ञापन में कहा कि सरकार मारफीन की मात्रा के आधार पर किसानों के पट्टे का निर्धारण करता है, जो कि गलत है। इसकी मात्रा वातावरण, भूमि, प्रकृति पर निर्भर करता है। सरकार को औसत से कमी की क्षम्य सीमा तय कर देनी चाहिए।

    वहीं किसी वर्ष औसत से अधिक अफीम विभाग को सौंपी जाती है तो उसे आगे के वर्षाें में सरप्लस मानकर जोड़ा जाए। उन्होंने धारा 8/29 का मामला उठाते हुए कहा कि इसमें 95 प्रतिशत मामलों में किसान बरी होते हैं। इस धारा की विसंगति से कईं किसानों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

    प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि अफीम की जांच तोल केन्द्र पर किसानों की उपस्थिति में की जानी चाहिए। उपज सरकार को सौंपने के बाद किसान को जिम्मेदार बताना गलत है। इसके अलावा अफीम प्लाॅट की नाप करने का तरीका भी तय नहीं है। जिससे नाप में भारी भ्रष्टाचार सामने आता है। अफीम सुखाने के दौरान वनज का रजिस्टर के अनुसार एक समान मिलना संभव नहीं होता है।

    इसके लिए ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि किसानों को परेशानी भी न हो भ्रष्टाचार भी रूके। कच्चा तोल करने के लिए कोई अधिकारी नहीं आता है। जिससे किसानों को भ्रष्टाचार का शिकार होना पड़ता है। वहीं प्रतिदिन के तोल का भी कोई औचित्य नहीं है। जितनी भी उपज है, वह किसान की होती है, ऐसे में तोल के नाम पर होने वाले भ्रष्टाचार को खत्म किया जाए।

    अफीम लम्बरदार व्यवस्था खत्म हो
    भारतीय किसान संघ की ओर से अफीम के मूल्य बढाने, अफीम लम्बरदार व्यवस्था को समाप्त करने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने लम्बरदार को भ्रष्टाचार का कारण बताया। इसके अलावा डोडा चूरा की खरीद को बंद करने के बाद इसे खेत में डलवाने की व्यवस्था कराने की बात कही। यह किसान की फसल का हिस्सा है, इसलिए इसे नष्ट करने पर उचित मुआवजा मिलना चाहिए।

    पोस्तादाना के आयात पर प्रतिबंध लगे
    अवैध डोडा चूरा मिलने पर एनडीपीएस एक्ट में मामला दर्ज किया जाता है। इसके बजाय इसे साधारण नशीले पदार्थ की श्रेणी में रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि पोस्तादाना के आयात पर पूर्ण प्रतिबंध लगना चाहिए। जिससे उचित मूल्य मिल सके। डब्ल्यूटीओ की नीतियां आस्टेलियन पद्धति से अफीम की खेती लोगों को बेरोजगार बना रही है। इसे बंद करना चाहिए।

    इन्होंने भी उठाई किसानों की पीड़ा
    संभागीय मीडिया प्रभारी आशीष मेहता, जिला अध्यक्ष गिरीराज चौधरी , जिला प्रचार प्रमुख रूपनारायण मालव ने चित्तौड, प्रतापगढ, कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़ के किसानों के साथ उपायुक्त नारकोटिक्स ब्यूरो को ज्ञापन सौंपकर किसानों की पीड़ा सामने रखी।