आस्था परिधानों से परे, मेरे पहनावे पर कोई कमेंट नहीं कर सकता : सांसद नुसरत

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सहारनपुर/कोलकाता । एक्टर एवं तृणमूल सांसद नुसरत जहां (29) ने अपने खिलाफ जारी फतवे पर जवाब दिया। उन्होंने कहा कि आस्था परिधान से परे हैं। वे क्या पहनती हैं, इस पर कोई बयान नहीं दे सकता। नुसरत के खिलाफ देवबंद से जुड़े एक धड़े ने फतवा जारी किया था। मुस्लिम धर्मगुरुओं का कहना है कि इस्लाम में सिंदूर और मंगलसूत्र की इजाजत नहीं है। व्यवसायी निखिल जैन से विवाह करने वाली नुसरत संसद में मंगलसूत्र और सिंदूर में नजर आई थीं।

बंगाल के बशीरहाट से सांसद नुसरत ने शनिवार रात ट्वीट किया। उन्होंने लिखा- मैं संयुक्त भारत की प्रतिनिधि हूं, जो धर्म, जाति और पंथ से परे है। कट्टरपंथियों के बयानों पर ध्यान देने का मतलब घृणा और हिंसा को जन्म देना है। इतिहास इसका गवाह रहा है।

नुसरत ने कहा- मैं मुस्लिम हूं और रहूंगी। मैं पहनने के लिए किस परिधान का चुनाव करती हूं, इस पर किसी को कुछ बोलने का अधिकार नहीं है। आस्था परिधानों से परे है। आस्था का मतलब विश्वास है। यह अनमोल सिद्धांतों का पालन करना होता है।

मुस्लिम धर्मगुरुओं का कहना है कि नुसरत ने जैन धर्म में शादी करके इस्लाम का अनादर किया है। उनका पहनावा गैर-इस्लामिक है। जामिया शेख-उल हिंद के मुफ्ती असद कासमी ने कहा- मुस्लिम केवल मुस्लिम से ही विवाह कर सकता है। मुस्लिमों को केवल अल्लाह के आगे झुकने की इजाजत है। इस्लाम में वंदेमातरम्, मंगलसूत्र और सिंदूर के लिए कोई जगह नहीं है। यह मजहब के खिलाफ है।

दिल्ली की फतेहपुरी मस्जिद के शाही इमाम मुफ्ती मुकर्रम अहमद ने कहा- मुझे फतवे के बारे में कोई जानकारी नहीं है। लेकिन, इस्लाम सिंदूर की इजाजत नहीं देता। यह मुस्लिम संस्कृति नहीं है और यह विवाह भी नहीं है।अहमद ने कहा- यह दिखावे के लिए किया गया रिश्ता दिखाई देता है। मुस्लिम और जैन दोनों ही इसे शादी नहीं मानेंगे। उन्होंने (नुसरत) बड़ा गुनाह किया है, उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था।

जून की शुरुआत में नुसरत ने कारोबारी निखिल जैन से विवाह किया था। 25 जून को नुसरत ने संसद में शपथ ली थी। उन्होंने शपथ ग्रहण के बाद वंदे मातरम् कहा था।