राजस्थान के किसानों की खाद की एमपी में कालाबाज़ारी, 3 डीलरों के लाइसेंस सस्पेंड

0
24

कोटा। गहलोत सरकार के राज में राजस्थान में उर्वरक की मारामारी मचने लगी हैं। खरीफ़ फसल सीजन शुरू होते ही उर्वरक (खाद) की डिमांड के साथ कालाबाजारी भी होने लगी है। खाद राजस्थान की सीमा से मध्यप्रदेश पहुंच रहा है। ऐसे में मंगलवार को कोटा डिविजनल कमिश्नर केसी मीणा के निर्देश पर तीन डीलरों के लाइसेंस 7 दिन के लिए निलंबित किए गए हैं। क्योंकि एक डीलर ने 1170 कट्टा खाद रातों रात खपा दी। 30-40% खाद मध्यप्रदेश के किसानों को बेच दिया। पॉश मशीन की डिटेल में यह सामने आया। कृषि विभाग की जांच की कार्रवाई में ऐसा गड़बड़ झाला पकड़ा गया।

दिन में डीलर्स के यहां व सोसाइटियों के बाहर किसानों रेलमपेल दिखाई दे रही है, तो रात के अंधेरे में उर्वरक राजस्थान में गहलोत के राज से मध्यप्रदेश में शिवराज के राज में पहुच रहा था। रात में राजस्थान के इटावा- खातौली कस्बों के डीलर मध्यप्रदेश के किसानों को खाद पहुंचा रहे थे। रात के अंधेरे में खाद से लोड ट्रेक्टर ट्रालियां राजस्थान से मध्यप्रदेश जा रही थी।ऐसे में इस कालाबाजारी का भंडाफोर्ड़ करने के लिए किसानों ने मध्यप्रदेश सप्लाई हो रही खाद के वीडियो बनाए, ताकि गहलोत सरकार को जगाया जा सके, सबूत दिखाए जा सके।

सबूत देख डीलर पर कार्रवाई
ये वीडियो किसानों ने सरकार के कृषि अधिकारियों को भेजे। इसके बाद सरकार जागी। मंगलवार को सरकार किसानों की शिकायत पर हरकत में आई। शिकायत का सत्यापन करवाया उसके बाद, सम्भागीय आयुक्त के निर्देश पर कोटा कृषि विस्तार विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ रामावतार शर्मा के सुपरविजन में विभाग की टीमों ने कार्रवाई की।

राजस्थान के किसानों के हक का डीएपी और अन्य खाद उर्वरक मध्यप्रदेश के किसानों को बेचने का दोषी मानते हुए कड़ी कार्रवाई की। कोटा जिले के खातौली के तीन उर्वरक विक्रेताओं के लाइसेन्स निलम्बित कर दिए गए। 7 दिन के लिए तीनों खाद विक्रेताओं का लाइसेंस निलंबित किया गया। निलम्बन काल में किसी भी प्रकार के उर्वरकों का क्रय-विक्रय नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं।

संयुक्त निदेशक कृषि ने बताया कि मैसर्स शम्भूदयाल मंगल, मैसर्स घनश्याम गोयल एण्ड कम्पनी एवं मैसर्स गोयल फर्टीलाईजर्स एण्ड केमीकल्स फर्मो का निरीक्षण कर विक्रय किये गये। उर्वरक के स्टॉक की जानकारी ली। जिसमें फर्माे द्वारा आदान उर्वरक का बेचान समीपवर्ती राज्य मध्यप्रदेश में किया जाना पाया गया। जो कि उर्वरक (मूवमेन्ट नियंत्रण) का उल्लंघन है।