Wednesday, June 10, 2026
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जेईई एडवांस का कोटा में सेंटर नहीं, एग्जाम 21 को

कोटा में एडवांस की तैयारी कर रहे हजारों स्टूडेंट्स को एग्जाम देने अन्य शहरों में जाना पड़ेगा।

कोटा। आईआईटी, एनआईटी, ट्रिपलआईटी एवं जेएफटीआर समेत देश के अन्य प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग  कॉलेजों में दाखिले के लिए जेईई एडवांस एग्जाम  21 मई  को आयोजित होगा। इस बार सीबीएसई की ओर से जेईई एडवांस भारत के अलावा छह अन्य देशों में भी आयोजित होगा, लेकिन कोटा में सेंटर नहीं होने से कोटा में एडवांस की तैयारी कर रहे हजारों स्टूडेंट्स को एग्जाम देने अन्य शहरों में जाना पड़ेगा।

इस वर्ष श्रीलंका में कोलंबो, बांग्लादेश में ढाका, सिंगापुर, नेपाल में काठमांडू, यूएई में दुबई और इथोपिया के एडिस अबाबा शहर में भी एडवांस एग्जाम होगा। 19 सीटों के लिए इन देशों से लगभग 500 प्रतिभागी शामिल होंगे। प्रदेश में अजमेर, अलवर, भीलवाड़ा, बीकानेर, जोधपुर, पिलानी, सीकर, टोंक, उदयपुर व जयपुर शामिल हैं।

कॉल ड्रॉप की जांच के लिये परीक्षण की शुरुआत इसी माह से: ट्राई

नयी दिल्ली। दूरसंचार क्षेत्र का नियामक (ट्राई) संभवत: इसी महीने से दूरसंचार आपरेटरों की सेवा गुणवत्ता और कॉल  ड्रॉप मामलों की स्वतंत्र तौर पर जांच की इसी महीने से शुरुआत कर सकता है। यह काम पांच माह से अधिक के अंतराल के बाद होगा।

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) के अध्यक्ष आर.एस. शर्मा ने पीटीआई- से कहा, स्वतंत्र रूप से परीक्षण का काम जल्द शुरू होने जा रहा है। वास्तव में इसमें कुछ अंतर आ गया था, जिसे दूर कर लिया गया है, संभवत: वह इस महीने से इसकी शुरुआत कर लेंगे।

दूरसंचार कंपनियां जहां एक तरफ अपनी प्रदर्शन निगरानी रिपोर्ट को नियमित रूप से ट्राई को सौंपतीं हैं वहीं नियामक भी स्वतंत्र एजेंसियों के जरिये सेवा गुणवत्ता का आकलन और उसका ऑडिट भी करता है।

एजेसियों ने दूरसंचार आपरेटरों के कामकाज का आकलन और ऑडिट करने के लिये देशभर में विभिन्न शहरों में नमूने के तौर पर परीक्षण की शुरुआत भी की है।

शर्मा ने कहा कि यह स्वतंत्र रूप से किया जाना वाले परीक्षण आपरेटरों की सहातया से होने वाले परीक्षण से अलग होता है। उन्होंने कहा, हम 11-12 शहरों में परीक्षण की शुरुआत कर रहे हैं। हम और ज्यादा शहरों में यह करेंगे। यह कंपनियों की सहायता से होने वाले परीक्षण से अलग होगा।

जीएसटी 1 जुलाई से लागू होना तय, वित्त मंत्री ने कहा

आईआई-कोटक निवेशक गोलमेज सम्मेलनमें वित्त मंत्री जेटली बोले

टोक्यो। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सोमवार को कहा कि जीएसटी 1 जुलाई से लागू होना तय है। इससे वस्तुओं के दाम ज्यादा नहीं बढ़ेंगे, हालांकि कुछ सेवाओं की लागत में मामूली वृद्घि हो सकती है। जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक 18-19 मई को होनी है, जिसमें टैक्स की दरों को अंतिम रूप दिया जाएगा।

देश की आजादी के बाद जीएसटी को सबसे बड़ा टैक्स सुधार बताते हुए जेटली ने कहा कि जीएसटी से राज्य और केंद्र के स्तर पर लगने वाले टैक्स की जगह एक राष्ट्रीय बिक्री कर लगेगा जो देश में एकल बाजार का निर्माण करेगा और कारोबारियों के लिए उसकी पहुंच आसान बनाएगा।

‘आईआई-कोटक निवेशक गोलमेज सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए जेटली ने कहा कि उनकी अध्यक्षता और हर राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाली जीएसटी काउंसिल अगले कुछ दिन में विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं के लिए टैक्स की दरों को अंतिम रूप देगी। देश 1 जुलाई से अप्रत्यक्ष करों को आसान बनाने के सही रास्ते पर है।

मौजूदा ढांचा जटिल

वित्त मंत्री जेटली ने कहा, ‘भारत में मौजूदा अप्रत्यक्ष कर ढांचा काफी जटिल है, जो लोग वस्तु या सेवा क्षेत्र में काम करते हैं उन्हें अलग-अलग अथॉरिटी के साथ काम करना होता है।’

जेटली ने कहा, ‘पूरा देश कई बाजारों में विभाजित है। ऐसे में वस्तु या सेवाओं का मुक्त आवागमन मुमकिन नहीं है। अब जीएसटी से पूरे देश में एक ही टैक्स होगा।’ उन्होंने कहा कि जीएसटी व्यवस्था में वस्तुओं पर टैक्स की दर जहां मामूली तौर पर कम होगी तो वहीं सेवाओं पर थोड़ी ज्यादा होगी।

नहीं बढ़ेगी महंगाई

जीएसटी लागू होने से महंगाई बढ़ने के सवाल पर जेटली ने कहा, ‘जहां तक मेरा मानना है, ऐसा नहीं होगा। यदि ऐसा होता भी है तो यह अस्थायी असर होगा।’

उन्होंने कहा कि संविधान में संशोधन के बाद राज्य संबंधित राज्य जीएसटी कानून पारित कर रहे हैं। यह प्रक्रिया जारी है और उन्हें इसमें कोई कठिनाई नजर नहीं आती।

28 अंक की बढ़त के साथ निफ्टी ने छुआ 9300 का आंकड़ा

मुंबई। शेयर बाजार सोमवार को एक दायरे में कारोबार करने के बाद बढ़त के साथ बंद हुआ है। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 67 अंक की तेजी के साथ 29,926 के स्तर पर और निफ्टी 28 अंक की बढ़त के साथ 9314 के स्तर पर कारोबार कर बंद हुआ है। नैशनल स्टॉक एक्सचेंज पर मिडकैप इंडेक्स में 0.63 फीसद और स्मॉलकैप 1.20 फीसद की तेजी के साथ कारोबार कर बंद हुए है।

रियल्टी सेक्टर में जमकर खरीदारी

सेक्टोरियल इंडेक्स की बात करें तो एफएमसीजी (0.80 फीसद) और मेटल (0.08 फीसद) को छोड़ सभी सूचकांक हरे निशान में कारोबार कर बंद हुआ है। रियल्टी सेक्टर में चार फीसद से भी ज्यादा का उछाल देखने को मिला है। वहीं, निफ्टी बैंक (0.72 फीसद), ऑटो (0.58 फीसद), फाइनेंशियल सर्विस (0.18 फीसद), आईटी (1.22 फीसद) और फार्मा (0.86 फीसद) की तेजी देखने को मिली है।

सीमेंट शेयर्स टॉप गेनर

दिग्गज शेयर्स की बात करें तो निफ्टी में शुमार शेयर्स में से 33 हरे निशान में और 18 गिरावट के साथ कारोबार कर बंद हुए है। सबसे ज्यादा तेजी अंबूजा सीमेंट, आईशर मोटर्स, एसीसी, ऑरोफार्मा और भारती एयरटेल के शेयर्स में हुई है। वहीं, गिरावच आईटीसी, बीपीसीएल, बजाज ऑटो, एचडीएफसी और आईओसी के शेयर्स में हुई है।

ऑटो सेक्टर में खरीदारी

सेक्टोरियल इंडेक्स की सभी सूचकांक हरे निशान में कारोबार कर रहा है। सबसे ज्यादा खरीदारी ऑटो सेक्टर में खरीदारी देखने को मिली है। निफ्टी बैंक (0.28 फीसद), फाइनेंशियल सर्विस (0.11 फीसद), एफएमसीजी (0.28 फीसद), आईटी (0.16 फीसद), मेटल (0.01 फीसद), फार्मा (0.40 फीसद) और रियल्टी (0.12 फीसद) की बढ़त देखने को मिल रही है।

निफ्टी के 32 शेयर हरे निशान में

दिग्गज शेयर्स की बात करें तो 32 शेयर हरे निशान में और 19 गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं। इंडिया बुल्स हाउसिंग फाइनेंस, एसीसी, अदानीपोर्ट्स, एचसीएलटेक और एशियनपेंट के शेयर्स में देखने को मिल रही है। वहीं, गिरावट बैंक ऑफ बड़ौदा, टाटा मोटर्स, हिंडाल्को, जील और टाटा मोटर्स डीवीआर के शेयर्स में देखने को मिल रही है।

‘शहर में रहने पर कर, तो कृषि आय पर क्यों नहीं’

स्वास्थ्य क्षेत्र की दिग्गज कंपनी अपोलो की कार्यकारी वाइस चेयरमैन शोभना कामिनेनी ने हाल ही में उद्योग संगठन सीआईआई के अध्यक्ष का पदभार संभाला है। प्रस्तुत है उनसे बातचीत के प्रमुख अंश –

कृषि आय पर कर लगाए जाने को लेकर सीआईआई का क्या रुख है?

सीआईआई कर में समानता पर विश्वास करता है। 90 प्रतिशत आबादी इतना कम कमाती है कि वह किसी कर के दायरे में नहीं है। वे कर वाली आमदनी के दायरे में नहीं आते। 

जो कर दायरे में हैं, उनके बारे में क्या कहना है?

वे बिल्कुल हमारे जैसे हैं। अगर मैं 5 लाख रुपये कमाती हूं और मेरे ऊपर सिर्फ इसलिए कर लगता है कि मैं शहर में रहती हूं तो अगर मैं खेती करती हूं तो कर क्यों नहीं लगना चाहिए। आप जानते हैं कि अभी जिस चीज पर चर्चा हो रही है, बाद में यह आवाज मजबूती से उभरेगी। मैं सिर्फ इसे कर समानता के दृष्टिकोण से देख रही हूं न कि राजनीतिक नजरिए से। लोग इस लाभ का दुरुपयोग भी कर रहे हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए। हम पारदर्शिता, सुशासन और समता में विश्वास करते हैं।

क्या आपको लगता है कि और कारोबारी संगठन इस मसले पर आपके विचार का समर्थन करेंगे?

हम कृषि पर ज्यादा कर की वकालत नहीं कर रहे हैं। हम सभी यह कह रहे हैं कि समानता लाई जानी चाहिए। हम कर लगाने की वकालत नहीं कर रहे हैं क्योंकि वह हमारा काम नहीं है। 90 प्रतिशत लोग कर के दायरे में नहीं आते। मैं ज्यादा चाहती हूं। मेरा मानना है कि सभी किसानों को सड़क, पानी, बिजली की सुविधा मिलनी चाहिए। सीआईआई इस तरह के विकास संबंधी मसलों पर काम करता है, जो उन कुछ लोगों पर कर लगाए जाने की तुलना में ज्यादा अहम है। 

वित्तीय वर्ष में प्रस्तावित बदलाव के बारे में सीआईआई ने कुछ आपत्तियां जताई हैं। ऐसा क्यों?

हमने इसका एक सिरे से विरोध नहीं किया है। हमने सरकार के सामने शंकर आचार्य समिति की रिपोर्ट को लेकर अपनी राय रखी है। हम इससे होने वाले लाभ को समझने की कोशिश कर रहे हैं। 

आपका कहना है कि  मेक इन इंडिया सिर्फ विदेशी नहीं बल्कि घरेलू निवेशकों के लिए भी है। आपको निवेश में कब तक तेजी आने की उम्मीद है?

यह तेजी तब आएगी जब बैंक कर्ज देने को तैयार होंगे और इससे दूर नहीं भागेंगे। अभी वे अपने बैलेंस शीट के मसले से जूझ रहे हैं। एनपीए अध्यादेश पर हस्ताक्षर के बाद स्थिति सुधरेगी। उद्योग जब कर्ज लेने लगेंगे तो मांग भी जोर पकड़ेगी। 

कब तक ऐसा होने की संभावना है?

मांग दो स्थितियों में जोर पकड़ेगी। अगर मौजूदा क्षमता में खपत बढ़ती है तो कंपनियों को अपनी क्षमता बढ़ानी पड़ेगी। दूसरी स्थिति है कि जब कर में समानता आए। आप 50 करोड़ रुपये के बाद कारोबार बढ़ाने पर हतोत्साहित किए जाते हैं। आपको 30 प्रतिशत कर का भुगतान करना होता है। अगर आज मैं 25 प्रतिशत के स्तर पर हूं तो मैं ऐसा क्यों नहीं करना चाहूंगी। यह दोनों स्थितियां अनुकूल ब्याज दर पर निर्भर हैं। यहीं पर हम संघर्ष कर रहे हैं। ब्याज दरें कम करने की जरूरत है। 

जीएसटी को लेकर उद्योग, खासकर छोटी फर्में कितनी तैयार हैं, मलेशिया के अनुभव कहते हैं कि इसे लागू करने के बाद काफी व्यवधान आए थे?

इस विषय पर मैं यह कहना चाहती हूं कि सरकार बेहतर करने में कभी नहीं हिचकती। इस समय थोड़ा भ्रम की स्थिति है और इसे सुचारु होने में थोड़ा वक्त लगेगा। लेकिन मेरा मानना है कि उद्योग की तैयारी अच्छी है। हम लंबे समय से जीएसटी की मांग कर रहे हैं और सीआईआई के सदस्य लंबे समय से इसके लिए काम कर रहे हैं। ऐसे में मलेशिया जैसी समस्या नहीं होगी।

सरकार की कार्पोरेट कर घटाने की कवायदों को को लेकर आपको कितनी उम्मीद है?

बहुत उम्मीद है। उन्होंने दरें 25 प्रतिशत की हैं, अब आगे देखते हैं। उनके लिए भी यह केवल व्यय नहीं है। अगले बजट में इस दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं। कर आधार बढ़ रहा है, यह अच्छा है।

-साभार बीएस 

SBI ने सस्ते मकानों के लिए आवास ऋण पर ब्याज दर घटाई

महिलाओं को अब इस कटौती के साथ 8.35 प्रतिशत की दर पर आवास ऋण उपलब्ध होगा

मुंबई। सार्वजनिक क्षेत्र के भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने सस्ते मकानों के आवास ऋण पर ब्याज दर में 0.25 प्रतिशत तक की कटौती की है। योजना के तहत कर्ज लेने वाली महिलाओं को अब इस कटौती के साथ 8.35 प्रतिशत की दर पर आवास ऋण उपलब्ध होगा। सरकार की सस्ते मकानों की इस नई योजना के तहत 30 लाख रुपये तक आवास ऋण लिया जा सकता है।

स्टेट बैंक के प्रबंध निदेशक (राष्ट्रीय बैंकिंग) रजनीश कुमार ने बताया कि पुरुष ग्राहकों के लिए यह सीमित अवधि की योजना 31 जुलाई तक के लिए उपलब्ध है। इसमें वेतनभोगी वर्ग के लिए ब्याज दर 0.20 प्रतिशत घटाकर 8.40 प्रतिशत की गई है जबकि गैर-वेतनभोगी वर्ग के लिए इसमें 0.15 प्रतिशत की कटौती की गई है।

इसी प्रकार वेतनभोगी महिला ग्राहकों के लिए योजना के तहत ब्याज दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती उपलब्ध होगी और उन्हें 8.35 प्रतिशत दर पर आवास ऋण उपलब्ध होगा। वहीं गैर-वेतनभोगी महिलाओं के लिए ब्याज दर में 0.20 प्रतिशत की कटौती की गई है। उन्होंने कहा कि आवास ऋण लेने वालों के लिए यह बड़ी कटौती है।

ब्याज दर में 0.25 प्रतिशत की कमी का मतलब मासिक किस्त (ईएमआई) में 530 रुपये की बचत होना है। नई दरें कल से प्रभावी होंगी। कुमार ने कहा कि यह प्रधानमंत्री की 2022 तक सभी को अपना घर उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि एसबीआई इस मामले में बैंक उद्योग में सबसे कम दरों की पेशकश कर रहा है।

उन्होंने बताया कि एसबीआई का कुल आवास ऋण 2,230 अरब रुपये पर पहुंच चुका है। इस लिहाज से उसकी बाजार हिस्सेदारी 25-26 प्रतिशत बैठती है। हालांकि, उन्होंने कहा कि इस नई पेशकश से बैंक की बाजार हिस्सेदारी पर खास फर्क नहीं पड़ेगा, क्योंकि इस 2,230 अरब रुपये के ऋण में से 45 प्रतिशत 30 लाख रुपये से कम का है।

ऐप्स आपको बना सकते हैं ‘प्रेगनेंट’ पर कैसे !

न्यूयॉर्क। ऐप्स आपको बना सकते हैं ‘प्रेगनेंट’ पर कैसे ! बाजार में ऐसे कई ऐप्स मौजूद हैं जिनकी मदद से महिलाएं अपने पीरियड्स पर नजर रख सकती हैं। हालांकि ताजा रिपोर्ट में इनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठा है।

अब तक माना जाता  था कि इन पीरियड ट्रैकिंग ऐप्स में अपना डेटा दर्ज करने के बाद महिलाएं गर्भनिरोधक साधनों के बगैर प्रेंगनेंट होने से बच सकती हैं। ये ऐप्स महिला के पीरियड साइकल के आधार पर बताते हैं कि उसे कब संबंध बनाना चाहिए या कब नहीं।

बहरहाल, अमेरिका में यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन की अध्ययन रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि ये ऐप्स उतने भरोसेमंद नहीं हैं, जितना इन्हें बनाने वाली कंपनियां दावा करती हैं। ऐसी कई महिलाएं सामने आई हैं, जो इन ऐप्स के भरोसे रहीं और बाद में उन्हें निराशा हाथ लगी।

अनुसंधानकर्ताओं ने नौ सर्वाधिक लोकप्रिय पीरियड ट्रैकिंग ऐप्स का इस्तेमाल करने वालीं 687 महिलाओं पर सर्वे से आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की है। रिपोर्ट के मुताबिक, महिलाओं ने अपनी अलग-अलग जरूरतों की पूर्ति के लिए इन ऐप्स का इस्तेमाल शुरू किया था।

मसलन – किसी को अपने शरीर और उसमें होने वाले बदलावों पर नजर रखना थी, तो किसी को पीरियड्स के लिए खुद को तैयार करना था, वहीं कोई प्रेंगनेंट होना चाहती थी तो कोई इससे बचना चाहती थी। यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन के जानकारों के अनुसार, अधिकांश महिलाओं के अनुभव बुरे रहे।

GST : 20 लाख तक के कारोबार पर टैक्स नहीं लगेगा

कोटा । प्रस्तावित जीएसटी में छोटे व्यापारियों के लिए 20 लाख रुपये तक के व्यवसाय पर कोई टैक्स नहीं देना होगा। यह छोटे व्यापारियों के लिए जीएसटी लाभदायक होगा। यह जानकारी रविवार को कॅरिअर प्वाइंट ऑडिटोरियम में  जीएसटी पर आयोजित टॉक शो में दी गई। जिसका आयोजन कॅरिअर प्वाइंट स्कूल आॅफ कॉमर्स एंड मैनेजमेंट के विद्यार्थियों द्वारा किया गया था। ।

इसमें मुख्य वक्ता केन्द्रीय एक्ससाइज एवं सर्विस टैक्स उपायुक्त  नरेश बुंदेल,  वाणिज्यिक कर विभाग के उपायुक्त नरेन्द्र कुमार गुप्ता  ने जीएसटी के बारे जानकारी दी। बुंदेल ने कहा कि हर व्यापारी को जीएसटी में अपना रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य होगा। रजिस्ट्रेशन के बाद ही व्यापारी इस नई कर प्रणाली का लाभ उठा पाएंगें। 

सहायक वाणिज्यिक अधिकारी अनुपम शर्मा ने बताया कि छोटे व्यापारियों के लिए 20 लाख रुपये तक के व्यवसाय पर कोई टैक्स नहीं देना होगा।  यह सीमा इस साल से 1 करोड़ रुपए तक की जा सकती है।  इसका निर्णय 19 एवं 20 मई को होने वाली जीएसटी कमेटी की मीटिंग में लिया जाएगा।

वाणिज्यिक कर विभाग के उपायुक्त नरेन्द्र गुप्ता ने बताया कि  इस कर से प्राप्त धन से ही देश का विकास होता है। देश में कर केन्द्रीय सरकार तथा राज्य सरकार द्वारा लिया जाता हैं, लेकिन जीएसटी में अलग अलग कर नहीं वसूला जाएगा। इस समय जीएसटी में प्रस्तावित कर की दर 5, 12, 18 एवं 28 प्रतिशत हो सकती। 

कोटा में किन्नरों का पांच दिवसीय सम्मेलन आयोजित

कोटा| पांच दिन से चल रहा किन्नर सम्मेलन रविवार को संपन्न हो गया। रविवार को किन्नरों ने शोभायात्रा निकाली। शोभायात्रा में वे बैंड की धुनों पर नाचते-गाते चल रहे थे। किन्नर समाज की ओर से विश्वकर्मा भवन पत्थर मंडी में रीना किन्नर का गद्दीनशी कार्यक्रम किया गया था।

चार दिन से उनके कार्यक्रम चल रहे थे। इसमें देशभर के करीब 500 किन्नर शामिल हुए। रविवार सुबह किन्नर समाज ने ताराबाई के नेतृत्व में शोभायात्रा निकाली, जो महावीर नगर सैकंड, महावीर नगर थर्ड होती हुई घटोत्कच चौराहा और वापस विश्वकर्मा भवन पहुंची। शहीदों के लिए दुआ मांगी गई। वहीं मंदिरों में घंटे चढाएं गए। महावीर नगर इलाके की गद्दी पर विराजमान हुई रीना किन्नर ने घर पर पगफेरा किया।

उदयपुर का IIM कैम्पस देश भर में सबसे बड़ा होगा

अरावली की पहाड़ियों के बीच 300 एकड़ में बनेगा आईआईएम कैम्पस,  2020 तक तैयार होगा 

उदयपुर। शहर से 15 किलोमीटर दूर बलीचा स्थित अरावली की पहाड़ियों के बीच 300 एकड़ में बन रहा आईआईएम उदयपुर का विशाल कैम्पस देश के सभी आईआईएम संस्थानों से बड़ा और सेल्फ सस्टेंड कैम्पस होगा।जो वर्ष  2020 तक तैयार होगा ।

 कैम्पस में बिजली, पानी, ईंधन के लिए इसे किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। कैंपस पूरी तरह ईको-फ्रेंडली और फ्यूल फ्री होगा। इसके अतिरिक्त प्रोजेक्ट में कई स्मार्ट सुविधाएं भी हैंं जो कैंपस को स्मार्ट बनाएंगी।

कैम्पस में पांच झीलें होंगी

नए कैम्पस में 5 बड़ी झीलें होंगी जिसमें 213 मिलियन लीटर पानी रहेगा। आईआईएम का सालाना पानी का उपभोग 157 मिलियन लीटर है। बरसात के दौरान इन झीलों में पानी एकत्रित होगा। कैम्पस को कैचमेंट से इस तरह जोड़ा गया है कि बारिश का एक बूंद पानी भी बेकार नहीं जाएगा।

छत से मिलने वाले 50 मिलियन लीटर पानी को पीने और शेष 107 मिलियन लीटर को अन्य कामों में उपयोग किया जाएगा। शेष 56 मिलियन लीटर पानी का उपयोग सिंचाई में किया जाएगा।