गरीब बच्चों को निःशुल्क पढ़ाने की ‘कोशिश’ सफल

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बेमिसाल : शिक्षा नगरी में 67 गरीब बच्चों को स्वयंसेवी संस्था ‘कोशिश’ दे रही निशुल्क शिक्षा 

अरविंद, कोटा। एक छोटी सी ‘कोशिश’ हमारे नेक इरादों को सफल कर सकती है। मन में गरीब की मदद करने का जुनून हो तो कोशिश करके देखिए, सफलता अवश्य मिलेगी। पुलिस लाइन के सरकारी स्कूल में बच्चों को रोज 2 घंटे निशुल्क साइंस पढ़ा रही शिक्षका वंदना गुप्ता ने यह कर दिखाया।

उन्होंने एक छोटी सी ‘कोशिश’ से नवाचार का खुला आंगन सजा दिया। पूर्व जुलाई,2016 में गोपाल विहार स्थित घर से 8 गरीब बच्चों को निःशुल्क पढ़ाना शुरू किया। एक वर्ष की मेहनत से अच्छे परिणाम सामने आए तो गरीब बच्चों की संख्या 67 तक पहुंच गई।

‘कोशिश’ में आसपास की बस्तियों में रहने वाले बेलदार, दिहाड़ी मजदूर, कारीगर, प्लम्बर, ड्राइवर, ऑटोचालक, पेंटर व सब्जी बेचने वाले परिवारों के बच्चे सरकारी स्कूल के बाद रोज शाम को ढाई घंटे निशुल्क पढ़ने आते हैं।

बेमिसाल गुदड़ी के लाल
बोरखेड़ा में एक इंर्ंट मजदूर का 5 वर्षीय बेटा रोहित बडे़ बच्चों से दिमागी मुकाबले में एक कदम आगे है। उसके माता-पिता अनपढ़ हैं लेकिन उसे नर्सरी में 15 तक पहाडे़ याद है।

कॉपी में 100 अंकों तक वह इंग्लिश में स्पेलिंग लिख देता है। बांये हाथ से लिखते हुए वह प्राइवेट स्कूल के बच्चों को पीछे छोडता है। मोबाइल नहीं देखा लेकिन कविताएं-कहानियां सुनाकर चकित कर देता है। वह अच्छा इंजीनियर बनना चाहता है।

अटवाल नगर की एक झौंपड़ी में गुजारा कर रहे बेलदार गब्बू पारगी का बेटा विनीत सरकारी स्कूल में कक्षा-7 का छात्र है। वह रोज 2 घंटे ‘कोशिश’ में इंग्लिश व गणित पढ़ रहा है।

मां कांता ने बताया कि छोटे बेटे आदित्य और आजाद हैं। बच्चों को पढ़ाने के लिए वे यहां मजदूरी कर रहे हैं। इसी बस्ती की टापरी में रहने वाले सुरेश सिगाड़ व पत्नी हीराबाई दोनों दिहाड़ी मजदूर हैं।

बेटे श्रवण कक्षा-7 एवं करण कक्षा-8 में सरकारी स्कूल से ‘कोशिश’ में पढ़ने जाते हैं। चूल्हे पर रोटी बनाने वाली हीरा को भरोसा है कि कोशिश संस्था की बदौलत उनके बच्चे पढ़कर कुछ बन जाएंगे।

गरीबी की रेखा से भविष्य के सपने बुन रहे
सहरिया क्षेत्र के एक कारीगर की तीन बेटियां यहां पढ़ने आती हैं। भारती व खुशबू जुड़वां बहन हैं, जबकि दिव्या कक्षा-7 में हैं। तीनों मेहनत से पढ़ते हुए बहुत खुश हैं। एक नेपाली चौकीदार विक्रमराव के पास मकान नहीं है, वह एक मकान के अहाते में रहता है।

दोनों बेटे हेमंत व कुलदीप कोशिश में हिंदी, इंग्लिश व मैथ्स लगन से पढ़ते हैं। वे आगे पढ़कर पायलट बनने का ख्वाब देखते हैं। बोरखेड़ा में बेलदार की बेटी जया सरकारी स्कूल में कक्षा-4 में है।

उसमें आगे पढ़ने का आत्मविश्वास जाग उठा। ड्राइवर का बेटा पंकज, सेल्समेन कैलाश अग्रवाल के बच्चे कर्तव्य और छवि यहां पढाई कर कक्षा-10 में अव्वल हो गए। प्लम्बर हेमराज मीणा के बेटे कमल ने कक्षा-10 मे ए ग्रेड हासिल की, वह खुद छोटे गरीब बच्चों को पढ़ाएगा।

छुट्टियों में अपने जैसों को पढाएंगे
पेंटर अमृतलाल का बेटा इंग्लिश व मैथ्स में इतना कमजोर था कि कक्षा-6 की बुक्स नहीं पढ सकता था लेकिन एक साल कोशिश में आकर उसने खूब मेहनत की। एक पार्क में कोशिश के बच्चों ने मिलकर प्ले ग्राउंड विकसित किया, वे बेडमिंटन और क्रिकेट खेलते हैं।

वह पुलिस अधिकारी बनना चाहता है। बेलदार जमनालाल का बेटा सुनील कक्षा-8 में है लेकिन डॉ. कलाम की जीवनी से इतना प्रभावित हुआ कि वह वैज्ञानिक बनने के लिए मेहनत कर रहा है। मोनू कक्षा-7 में है, वह कोशिश में आकर इंग्लिश सीख गया। पिता रामनिवास बेलदार हैं।

बेलदार शिवनारायण का बेटा बबलू मेवाड़ा यहां दोस्त बनकर उसे पढ़ाता है। यहां इंग्लिश व वैदिक मैथ्स सीख चुके बेलदार के बेटे विष्णु छोटे बच्चों को इंग्लिश पढाएगा।

नींव खोदने वाले कालू भील की बेटी कृष्णा यहां अपने जैसे बच्चों को देख खुश होती है। मां झौपडी में रहती है। प्लम्बर की बेटी दीपिका कक्षा-10 के बाद बच्चों को मैथ्स पढ़ाएगी। जयहिंद नगर के मजदूर बद्रीलाल की बेटी हेमा और बेलदार रोडूलाल की बेटी करण कक्षा-8 में हैं। बोरखेड़ा के अबरार व वहाब यहां रोज पढ़ने आते हैं।

पढ़ाने का जज्बा हो तो ऐसा..
शहर के गरीब बच्चों को प्राइवेट स्कूलों की तरह पर निशुल्क क्वालिटी एजुकेशन देने से ‘कोशिश’ में 67 बच्चे जुड़ गए। उन्हें निशुल्क पढ़ाने के लिए अनुभवी शिक्षक आगे आए। आर्मी स्कूल से रिटायर्ड 61 वर्षीया स्नेहलता शर्मा यहां इंग्लिश और मैथ्स की क्लास लेती है।

रंगतालाब के गवर्नमेंट स्कूल में 10वीं का 100 प्रतिशत रिजल्ट देने वाले शिक्षक रमेश जैन 9वीं व 10वीं के बच्चों को इंग्लिश में दक्ष बना रहे हैं।एक हादसे में पत्नी की मौत हो जाने से बेटी हर्षिता बीएड करने के साथ यहां बच्चों को पढ़ाती है।

प्रतापनगर में ऑटोचालक की पत्नी आशा सिंह के 2 बच्चे यहां पढ़ते हैं, गरीब बच्चों की लगन देख इतनी खुशी मिली कि रोज डेढ़ किमी दूर पैदल चलकर वे बच्चों को पढ़ा रही हैं।

प्राइवेट स्कूल टीचर शशि शर्मा कक्षा-1 से 5 तक के बच्चों को निशुल्क मैथ्स पढ़ाती है। व्यवसायी संजय सिंह हफ्ते में 2 दिन यहां आकर बच्चों की एक्टिविटी क्लास में योगा, स्पोर्ट्स और कैम्प करते हैं।

लाइब्रेरी में 700 किताबों से मदद
सोशल मीडिया पर ‘कोशिश’ के मिशन से प्रभावित होकर नागरिक लाइब्रेरी के लिए उपयोगी बुक्स दे रहे हैं। बच्चों को यहां 700 से अधिक साइंस, इंग्लिश, मैथ्स, डिक्शनरी, कहानी, जीवनियां व प्रेरक किताबें निशुल्क पढ़ने के लिए दी जाती हैं।

कुछ परिवार अपने बच्चों के जन्मदिन, वैवाहिक वर्षगांठ या अन्य अवसर पर बच्चों को कपडे़, स्कूल बैग, बॉक्स व अन्य वस्तुएं वितरित करते हैं। इस मदद से गरीब बच्चे प्राइवेट स्कूल की तरह दिखने लगे हैं।