कोचिंग क्लासेज के भीष्म पितामह वीके बंसल का कोविड से निधन

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कोटा। कोचिंग क्लासेज के भीष्म पितामह कहलाने वाले वीके बंसल का सोमवार को निधन हो गया। है। कोविड-19 से संक्रमित होने के बाद बंसल ने सोमवार को अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलने के बाद 3000 करोड़ की कोचिंग इंडस्ट्रीज में शोक की लहर छा गई। बंसल क्लासेज के निदेशक वीके बंसल का निधन की खबर जैसे-जैसे सोशल मीडिया पर वायरल हुई उनके जानने वाले, परिचित और उनके स्टूडेंट उन्हें सोशल मीडिया के जरिए याद करते हुए श्रद्धांजलि दे रहे हैं।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी दिवंगत हुए वीके बंसल को श्रद्धांजलि दी है। लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने ट्वीट करते हुए लिखा है कि बंसल क्लासेज के निदेशक वीके बंसल का निधन समूचे शैक्षणिक जगत के लिए अपूर्णीय क्षति है। उन्होंने अपना जीवन शिक्षा की उन्नति और विद्यार्थियों के उन्नयन को समर्पित किया। उनसे पढ़े हजारों विद्यार्थी विश्व में भारत का नाम रौशन कर रहे हैं। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें।

बता दें कि वीके बंसल को कोटा कोचिंग क्लासेज का भीष्म पितामह का जाता है। राजस्थान का चंबल नदी के किनारे बसा कोटा शहर देश दुनिया में आईआईटी और मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी का गुरुकुल हैं। मौजूदा दौर में कोचिंग क्लासेज इंडस्ट्रीज 3000 करोड रुपए की है। कहते हैं कि इस कारोबार नींव रखने वाले वीके बंसल ने लालटेन की रोशनी में पढ़ाई की थी।

लाइलाज बीमारी के बाद छोड़नी पड़ी नौकरी
कोचिंग क्लासेज के जनक वीके बंसल के स्टूडेंट उनके लिए कहते हैं कि सर हमेशा परिश्रम को तवज्जो देते थे। कोटा कोचिंग की बुनियाद का श्रेय वीके बंसल को जाता है। कोटा जेके सिंथेटिक उद्योग में बंसल सहायक इंजीनियर थे। मस्कुलर डिस्ट्रॉफी नामक बीमारी के कारण सन 1991 में उन्होंने रिटायरमेंट लिया था। वहीं से उन्होंने बंसल क्लासेज की शुरुआत बहुत छोटे स्तर पर की थी।

नौकरी के दौरान भी वे घर पर बच्चों को ट्यूशन पढ़ाया करते थे। पहले साल में बंसल के 10 स्टूडेंट का आईआईटी में चयन हुआ था उसके दूसरे साल उनके 50 स्टूडेंट आईआईटी में चयनित हुए थे और इसके बाद कोटा आईआईटी और मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम की स्टूडेंट को बेहतर तैयारी कराने वाली फैक्ट्री के रूप में देश दुनिया में सिरमौर हो गया।

यूं तो शहर में सबसे पहली कोचिंग क्लास शुरू करने का श्रेय सीएमआई को जाता है। सीएमआई की स्थापना पॉलिटेक्निक कॉलेज के टीचर सीएम गोल्डस्मिथ साहब को जाता है। उनके गुजर जाने के बाद उनकी पत्नी और उनकी पुत्रियों ने कोचिंग को संभाला। बंसल क्लासेज की शुरुआत ट्यूशन क्लासेज के रूप में हुए थी। उस समय कोटा में सिर्फ दो ही कोचिंग क्लासेज थी।