सीटी स्कोर 25/25 होने पर भी युवक ने कोरोना को दी मात, जानिए कैसे

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कोटा। हिम्मत ए मर्दा, मदद ए खुदा! यह कोरोना पोजिटिव ऐसे मरीज की कहानी है, जिसका सीटी स्कोर 25/25 था, दोनों लंग्स 100 प्रतिशत इनवॉल्व थे, लेकिन न सिर्फ जान बची, बल्कि पोस्ट कोविड फाइब्रोसिस भी नहीं हुआ। यह सब तब संभव हुआ, जब मरीज ने बिना किसी देर के सकारात्मक सोच के साथ इलाज लिया। इतना ही नहीं ठीक होने के बाद भी 3 माह तक डॉक्टरों की सलाह पर दवाइयां ली।

मेडिकल कॉलेज में श्वास रोग विभाग के एसोसिएट प्राेफेसर डॉ. राजेंद्र ताखर ने बताया कि 35 साल का यह युवक नवंबर में बीमार हुआ था। तब इसे मेडिकल कॉलेज में मैंने एडमिट किया और सीटी स्कैन कराया तो इसका स्कोर 25/25 था। इसका मतलब यह होता है कि रोगी के दोनों लंग्स पूरी तरह संक्रमित हो चुके हैं।

ऐसी स्थिति बहुत कम मरीजों की जान बच पाती है। हालांकि उस वक्त बहुत ज्यादा मरीजों की भीड़ भी नहीं थी और सबकुछ नॉर्मल था, ऐसे में हमारे डॉक्टरों ने इस रोगी को वेंटीलेटर पर लिया और करीब 15 दिन हॉस्पिटल में एडमिट रहने के बाद डिस्चार्ज कर दिया। लेकिन घर पर भी इसे कुछ दिन तक ऑक्सीजन का सहारा लेना पड़ा, क्योंकि रिकवरी में बहुत ज्यादा समय लगता है।

अब मरीज स्वस्थ, लंग्स एकदम ठीक
रिकवर होने के बाद ऐसे रोगियों को पोस्ट कोविड फाइब्रोसिस होने का खतरा पूरा रहता है, पोस्ट कोविड फाइब्रोसिस एक बार डवलप हो जाए तो उसका कोई इलाज नहीं है और यह जिंदगीभर की सांस की बीमारी बन जाती है। ऐसे में रिकवर होने के बाद इसे तीन माह तक एंटी फाइब्रोटिक ड्रग्स दी, ये दवाइयां कुछ महंगी आती है, लेकिन अब पहले जितनी महंगी भी नहीं है। तीन माह तक लगातार दवाइयां देने के बाद जब अभी इसका रिपीट सीटी स्कैन कराया तो सीटी स्कोर 0/25 आ गया, यानी अब लंग्स पूरी तरह पहले जैसे स्वस्थ हो गए।

लक्षणों को इग्नोर नहीं करें-
आजकल ज्यादातर मरीज इस तरह तर्क देते हैं कि ठंडा पानी पी लिया था, कूलर में सो गया था, इसलिए गला खराब है। यह नासमझी है, असल में ये कोविड के लक्षण होते हैं। इसलिए लक्षण दिखते ही खुद को आइसोलेट करके डॉक्टर की सलाह पर इलाज लें। 2. यदि आप बहुत ज्यादा संक्रमित होकर रिकवर हुए हैं तो भी आपको जिंदगीभर सांस की बीमारी से बचने के लिए एंटी फाइब्रोटिक दवाइयां लेनी ही चाहिए। क्योंकि यदि फाइब्रोसिस डवलप हो गए तो वह जिंदगीभर के लिए बने रहते हैं, उनका कोई इलाज नहीं है।