सरकार ने रेमडेसिविर से हटाया आयात शुल्क, अब सस्ता हो जाएगा ये इंजेक्शन

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नई दिल्ली। कोरोना से जूझ रहे देश को पहले तो सरकारी दखल के बाद सस्ती रेमडेसिविर (Remdesivir) इंजेक्शन का तोहफा मिला और अब मोदी सरकार ने रेमडेसिविर को लेकर एक और बड़ी घोषणा की है। मोदी सरकार ने रेमडेसिविर एपीआई, रेमडेसिविर इंजेक्शन और बीटा साइक्लोडेक्सट्रिन (जो रेमडेसिविर बनाने में इस्तेमाल होता है) को आयात शुल्क से मुक्त कर दिया है।

पीयूष गोयल ने खुद ट्वीट कर के इस बात की जानकारी दी और कहा कि इससे रेमडेसिविर इंडेक्शन की सप्लाई भी बढ़ेगी और साथ ही इससे लागत भी घटेगी। इस तरह सरकार के इस फैसले से कोरोना से जूझ रहे मरीजों को एक बड़ी मदद मिलेगी।

रेमडेसिविर की नई कीमत?
-कैडिला हेल्थकेयर लिमिटेड ने REMDAC इंजेक्शन का दाम 2800 रुपये से घटाकर 899 रुपये कर दिया है।
-सिंजीन इंटरनेशनल लिमिटेड ने RemWin इंजेक्शन का दाम 3950 रुपये से घटाकर 2450 रुपये कर दिया है।
-डॉ. रेड्डीज लेबोरेट्रीज लिमिटेड ने REDYX इंजेक्शन का दाम 5400 रुपये से घटाकर 2700 रुपये कर दिया है।
-सिपला लिमिटेड ने CIPREMI इंजेक्शन का दाम 4000 रुपये से घटाकर 3000 रुपये कर दिया है।
-माइलैन फार्मास्युटिकल्प प्राइवेज लिमिटेड ने DESREM इंजेक्शन का दाम 4800 रुपये से घटाकर 3400 रुपये कर दिया है।
-जुबिलेंट जेनेरिक लिमिटेड ने JUBI-R इंजेक्शन का दाम 4700 रुपये से घटाकर 3400 रुपये कर दिया है।
-हेटेरो हेल्थकेयर लिमिटेड ने COVIFOR इंजेक्शन का दाम 5400 रुपये से घटाकर 3490 रुपये कर दिया है।

दोगुना होगा रेमडेसिविर का प्रोडक्शन
पिछले कुछ दिनों से ये बात सामने आनी शुरू हुई कि देश में एंटी-वायरल ड्रग रेमडेसिविर (Remdesivir) की भारी किल्लत हो गई है। अब सरकार ने किल्लत और कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए रेमडेसिविर के प्रोडक्शन की क्षमता (Remdesivir Production Capacity) दोगुना (Remdesivir Production will become Dobule) करने की इजाजत दे दी है। अभी तक 38.8 लाख रेमडेसिविर इंजेक्शन हर महीने बनते थे, अब इसे 78 लाख तक बढ़ाने के लिए कहा जा चुका है।

क्यों हो गई रेमडेसिविर की किल्लत?
एंटी-वायरल ड्रग रेमडेसिविर की किल्लत की दो बड़ी वजहें हैं। पहली तो यही है कि कोरोना के मामलों में अचानक तेजी आ गई है, जिससे डिमांड काफी बढ़ गई है। वहीं दूसरी बड़ी वजह ये है कि जनवरी और फरवरी में कंपनियों ने इस दवा का प्रोडक्शन ही कम कर दिया था। अचानक रेमडेसिविर की किल्लत होने पर सरकार को इसके निर्यात पर पाबंदी लगानी पड़ी।

इसलिए कम कर दिया प्रोडक्शन
फार्मा इंडस्ट्री के सूत्रों के मुताबिक दिसंबर 2020 से कोविड-19 के मामलों में कमी के कारण रेमडेसिविर की मांग कम हो गई जिससे जनवरी और फरवरी में कंपनियों ने इसका उत्पादन कम कर दिया या बंद कर दिया। इस कारण इसकी सप्लाई में कमी आई है। फार्मा इंडस्ट्री के एक सूत्र ने कहा कि दवा कंपनियां एक साथ इतनी भारी मात्रा में रेमडेसिविर बनाने का जोखिम नहीं उठा सकती हैं क्योंकि इस दवा की अवधि 6 से 8 महीने होती है। उन्होंने इस बात की पुष्टि की कि कंपनियां रेमडेसिविर का कम उत्पादन कर रही थी। इस दवा की किल्लत की एक और वजह कोरोना के मामलों में अचानक आई तेजी है।