भूमि की उर्वरा शक्ति लौटाने के लिए गांव-गांव जाएंगे संघ के स्वयंसेवक

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कोटा। भारत की कृषि भूमि के बिगड़ते स्वास्थ्य को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से राष्ट्रव्यापी पहल की गई है। जिसमें भारतीय किसान संघ समेत देशभर के तकरीबन 40 सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवी संस्थाओं को साथ लेकर भूमि सुधार का बड़ा अभियान किया जाएगा। जिसके अंतर्गत संघ के स्वयंसेवक गांव और शहर में भूमि सुधार से संबंधित उपक्रम करने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करेंगे। इसे आरएसएस की भूमि सुधार की दिशा में अभिनव पहल माना जा रहा है। कोटा संभाग के भी विभिन्न गांवों में इस अभियान के आगाज की विस्तृत रूपरेखा संघ के संयोजन में तैयार कर ली गई है।

अभियान की शुरूआत चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से की जाएगी। जिसमें प्रत्येक गांव में एक स्थान निश्चित कर भूमि पूजन उत्सव होगा। जिसमंे प्रत्येक किसान अपने खेत की एक मुठ्ठी मिट्टी लाकर एकत्रित करेंगे। जहां गौमाता और बछड़े समेत इस मिट्टी का कलश और श्रीफल रखकर पूजन किया जाएगा। इसके बाद सभी लोग पूजन की गई इस मिट्टी को ले जाकर अपने खेत में मिलाएंगे। भूमि पूजन उत्सव के दौरान प्रत्येक किसान मिट्टी क्षरण रोकने, मृदा संवर्द्धन करने, रासायनिक खाद व कीटनाशक का उपयोग न करने, सिंचाई में जल का अपव्यय रोकने, मेढ पर पेड लगाने, प्लास्टिक का उपयोग न्यूनतम करने जैसे विभिन्न संकल्प भी करेंगे।

अभियान के तहत संघ के स्वयंसेवक सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ मिलकर कृषि भूमि सुधार के लिए अनुकरणीय कार्य करने के लिए लोगों को प्रेरित और प्रशिक्षित करेंगे। इसमें वर्ष में एक माह के लिए भूमि को विश्राम देने, परंपरागत और आधुनिक मौसम विज्ञान के आधार पर वर्षा का पूर्व अनुमान, वर्षा की एक एक बूंद धरातल पर बहने के बजाय खेत में सोखने के उपाय, मेड बंधान, खेत में जीवांश मिलाना, गोबर खाद, कंपोस्ट खोद, केंचुआ खाद का उपयोग करने, फसल चक्र अपनाने, खरपतवार नष्ट करने के लिए डोरा, हस्त निंदाई, पशुचालित यंत्रों के उपयोग, हाइब्रिड के बजाय देशी चयनित उन्नत बीजों के उपयोग को प्रोत्साहन, कीट रोग प्रबंधन, कृषि यांत्रिकीकरण, मजदूरों का प्रबंधन, प्रशिक्षण आदि कार्यक्रमों के द्वारा अभियान को आगे बढाया जाएगा।

होंगे जनजागृति के कार्यक्रम
भूमि पूजन उत्सव के बाद लगातार विभिन्न कार्यक्रमों के द्वारा किसानों और आम जन को भूमि सुधार के विभिन्न कार्यक्रमों के द्वारा जनजागृति लाने के प्रयास किए जाएंगे। जिसके तहत प्राकृतिक और परपंरागत पद्धति से खेती करने वाले किसानों का सम्मान, गांव की समतल, ढलान, रंग, गहराई वाली भूमि के आधार पर मानचित्र तैयार किया जाएगा। भूमि आरोग्य और फसल चक्र के संदर्भ में किसानों के बीच परिचर्चाएं आयोजित की जाएगी। जिनमें कृषि विशेषज्ञों के द्वारा वार्तालाप भी कराया जाएगा। गांवों में उत्सव, त्योहार, गीतों के द्वारा जागृति के प्रयास होंगे। छोटे हस्तचालित, पशुचालित यंत्रों की प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी। नगरीय क्षेत्रों में प्राकृति पद्धति से निर्मित कषि उपज की बिक्री की व्यवस्था कराने में भी सहयोग किया जाएगा।

‘‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जो भी कार्य हाथ में लेता है, उसमें पूर्णतः भारतीय दृष्टि का समावेश होता है। भूमि सुधार की दिशा में किए जा रहे इस महत्वाकांक्षी अभियान के साथ भारतीय किसान संघ समेत कईं संगठन आरएसएस के साथ जुड़े हैं। इसके तहत जहां देश के किसानों की खेती लागत को कम करने में मदद मिलेगी, वहीं दूषित खाद्य पदार्थों के उपयोग से भी छुटकारा मिलेगा। इसका लाभ किसान और उपभोक्ता दोनों को है। संघ का यह अभियान ग्रामीण विकास में भी सहायक होगा, इसलिए यह केवल संघ का अभियान न होकर सम्पूर्ण देश का अभियान होगा। यही समय की आवश्यकता भी है।’