अब ट्रैन के एसी कोच में नहीं उड़ेगी नींद, जानिए क्यों

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नई दिल्ली। मैंने ने राजधानी एक्सप्रेस में टिकट लिया था, वह भी एसी टू टीयर (AC 2 Tier) में। आमतौर पर दिल्ली से पटना तक हवाई जहाज (Aeroplane) में जितना किराया लगता है, उससे ज्यादा किराया राजधानी एक्सप्रेस के एसी टू टीयर में लगता है। तब मैंने यह सोच कर राजधानी एक्सप्रेस का महंगा टिकट लिया कि आराम से सफर होगी। लेकिन मेरे लिए यह सफर दु:स्वप्न बन गया। लेकिन अब रेलवे बोर्ड (Railway Board) ने एक ऐसा फैसला किया है, जिससे मेरे जैसे यात्रियों की नींद नहीं उड़ेगी।

एसी कोच से हो गए परदे गायब
कोरोना काल (Corona Period) में जब रेल मंत्रालय (Ministry of Railways) ने ट्रेन सेवा फिर से चलाने का फैसला किया तो एसी डिब्बों में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव भी किया। पहला कि चादर, तौलिए, कंबल और तकिए की सप्लाई रोक दी। इसके बाद एसी कोच (AC Coach) में खिड़की पर लगे परदे हटा दिए। एसी टू के हर कूपे में लगे परदों को भी हटा दिया गया। ऐसा इसलिए, ताकि कोरोना वायरस का फैलाव परदों के जरिए नहीं हो।

एसी कोच से जब परदे हटे तो खिड़कियों पर लगे परदे भी हट गए। इसका घाटा यह हुआ कि लोगों की प्राइवेसी पर हमला हुआ। साथ ही रात में कोच की बत्ती बुझाने पर भी दो-तीन मिनट पर कोच में रोशनी खूब आती रहती है। हुआ यह है कि राजधानी एक्सप्रेस इस गति से चलती है कि तीन-चार मिनट के अंतराल में कोई न कोई स्टेशन गुजरता है। जैसे ही स्टेशन आई, स्टेशन के फ्लड लाइट की रोशनी कोच के अंदर। कोई स्टेशन पर गाड़ी रूकी तो बाहर खड़े लोग भी खिड़की के जरिए कोच का पूरा नजारा ले रहे हैं।

अब क्या हो रहा है
रेलवे बोर्ड में इस बावत शिकायत पहुंची। इसके बाद अधिकारियों ने खिड़की पर परदे का विकल्प ढूंढना शुरू किया। किसी अधिकारी ने कहा कि खिड़की पर पुराना परदा ही वापस लगा दिया जाए। इसे हर यात्रा के बाद निकाल कर धोया जाए। लेकिन इस योजना को लागू करना मुश्किल था। फिर एक सुझाव आया कि खिड़की के शीशे पर फिल्म लगा दिया जाए। लेकिन इस पर भी सहमति नहीं बनी। अब रेलवे बोर्ड ने तय किया है कि सभी एसी कोच की खिड़की पर परदे के बदले रोलर ब्लाइंड लगाया जाए।

क्या होता रोलर ब्लाइंड
रोलर ब्लाइंड (Roller Blinds) फैब्रिक का एक सिंगल पीस होता है। इसे इस कदर लगाया जाता है कि यह उपयोग नहीं होने पर सिमट जाए और खिड़की के उपर बने चैंबर में अंदर चला जाए। इस तरह का रोलर ब्लाइंड पहले जन शताब्दी एक्सप्रेस (Jan Shatabdi Express) की खिड़की पर लगाए गए थे। अब रेलवे बोर्ड ने इस तरह के रोलर ब्लाइंड को एसी कोच की सभी खिड़की पर लगाना तय किया है।