फर्जी दस्तावेज से संपत्ति हस्तांतरण के केस में रिटायर्ड RAS समेत चार को जेल

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कोटा। फर्जी दस्तावेज से नगर निगम कोटा की संपत्ति हस्तांतरण कर राज्य सरकार को नुकसान पहुंचाने के करीब 19 साल पुराने मामले में ACB कोर्ट ने फैसला सुनाया है। भ्रष्टाचार निवारण न्यायालय (ACB) के न्यायाधीश प्रमोद कुमार मलिक ने नगर निगम कोटा में कार्यरत तत्कालीन RAS अधिकारी कन्हैया लाल मीणा सहित चार को फर्जी दस्तावेज के आधार पर संपत्ति को विक्रय करने, निर्माण विक्रय स्वीकृति जारी करने के आरोप में 7-7 साल का कठोर कारावास और 21 लाख रुपए के जुर्माना भी लगाया है।

साल 2002 में आरोपियों ने कूट रचित दस्तावेज के आधार पर मिली-भगत करके सरकार को नुकसान पहुंचाया था। निगम के तत्कालीन कमिश्नर सहित तीन अन्य को के एल मीणा,जगन्नाथ व बब्बू गुप्ता पर 4.50-4.50 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है। जबकि आवंटी हरिसिंह पर 7.50 लाख रुपए का जुर्माना है।

नगर निगम कोटा में तत्कालीन लिपिक जगन्नाथ, कनिष्ठ अभियंता बब्बू गुप्ता व आवंटी हरिसिंह को सजा सुनाई है। जबकि आरोपी असलम शेर उर्फ मोहम्मद असलम, जगन प्रसाद कार्यालय अधीक्षक नगर निगम कोटा, सत्तू उर्फ सत्य प्रकाश शर्मा, ललित सिंह कार्यालय सहायक नगर निगम कोटा की मृत्यु होने से उनके विरुद्ध न्यायालय द्वारा कार्रवाई ड्राप कर दी गई है।

ये था मामला
सहायक निदेशक अभियोजन अशोक कुमार जोशी ने बताया 16 फरवरी 2002 को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो यशपाल शर्मा ने प्रकरण की जांच की थी। जांच में नगर निगम कोटा के कर्मचारी जगन प्रसाद, कार्यालय सहायक, ललित सिंह कार्यालय बाबू, बब्बू गुप्ता कनिष्ठ अभियंता, जगन्नाथ कनिष्ठ लिपिक नगर निगम कोटा ने कंसुआ निवासी हरि सिंह के साथ मिलीभगत करके अपने पद का दुरुपयोग किया। कूट रचित दस्तावेज के आधार पर नगर निगम कोटा की संपत्ति भूखंड संख्या 895 वाके शास्त्री नगर दादाबाड़ी को षडयंत्र पूर्वक कंसुआ निवासी हरि सिंह के नाम आवंटित कर राज्य सरकार को नुकसान पहुंचाया।

यह भूखंड पूर्व में पत्रकार कांति चंद जैन को आवंटित हुआ था, जो आवंटन पत्र बाद में निरस्त हो गया था। यह भूखंड नगर निगम कोटा में हस्तांतरित होने पर नगर निगम कोटा की संपत्ति बन गया था। हरि सिंह द्वारा झूठा शपथपत्र मंडी कमेटी चंबल परियोजना कोटा की फर्जी आवंटन पत्र व फर्जी रसीद संख्या 33208 ( 31 दिसंबर 1969) के आधार पर नगर निगम कोटा के उक्त कर्मचारी से मिली-भगत कर जानबूझकर वास्तविक तथ्यों को छुपाया और फर्जी कागजात पेश करने वाले हरि सिंह के पक्ष में नगर निगम से भवन निर्माण स्वीकृति, विक्रय स्वीकृति आदेश जारी करवाकर निगम, राज्य सरकार को नुकसान पहुंचाया।