न्यूजेन सॉफ्टवेयर की अक्षय पात्र फाउंडेशन के साथ भागीदारी

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कोटा। कोविड-19 की महामारी के चलते बच्चों के कल्याण के लिए चल रही गतिविधियां काफी प्रभावित हुई हैं, जिससे देश भर में कुपोषण की गंभीर स्थिति पैदा हो गयी है। महामारी के दौर में मिड-डे मील का लाभ पाने वाले बच्चों की सहायता के लिए न्यूजेन सॉफ्टवेयर कंपनी ने अक्षय पात्र फाउंडेशन के साथ मिड-डे मील और हैपीनेस किट्स के वितरण का काम शुरू किया है।

इसके तहत कंपनी ने झालावाड़, लखनऊ और वृन्दावन में 17378 बच्चों को दूसरे चरण के वितरण कार्यक्रम में 8689 किट्स का वितरण किया। न्यूजेन ने हाल ही में टीएपीएफ के साथ मिलकर अपनी भागीदारी को नया आयाम दिया है। इसके तहत झालावाड़ में अगले दो वर्षों के लिए दोनों साथ मिलकर मिड-डे मील प्रोग्राम और हैपीनेस किट्स के वितरण का काम करेंगे।

कंपनी, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी अक्षय पात्र का सहयोग मिड-डे मील प्रोग्राम के लिए वृन्दावन, झालावाड़ और गौहाटी में कर रहा है। इस पहल के बारे में न्यूजेन सॉफ्टवेयर की कारपोरेट कम्युनिकेशन और सीएसआर हेड, सुश्री प्रियदर्शिनी निगम ने कहा कि, हमने देश के दूरदराज इलाकों में लगभग 9,000 पिछड़े छात्रों के लिए मिड-डे मील और पौष्टिक आहार की सुविधा मुहैया कराने के लिए वर्ष 2019 में अक्षय पात्र फाउंडेशन के साथ भागीदारी शुरू की।

सुश्री निगम ने आगे बताया कि, न्यूजेन का मानना है कि बच्चों के जीवन के शुरुआती दिनों में अच्छे स्वास्थ्य और उचित पोषण का मिलना बहुत जरूरी है। कोविड-19 के समय हमने अक्षय पात्र फाउंडेशन के साथ मिलकर हैपीनेस किट्स के वितरण का काम शुरू किया, जिसके तहत प्रोजेक्ट वाली जगहों पर हमने अपने विद्यार्थियों और उनके परिवारजनों के लिए खराब न होने वाले राशन का मासिक वितरण किया।

सम्मिलित प्रयासों के चलते विद्यार्थियों को संकट के समय सहयोग का मौका मिला है। अक्षय पात्र फाउंडेशन के सीईओ श्रीधर वेंकट ने कहा कि, न्यूजेन सॉफ्टवेयर के साथ भागीदारी के लिए बहुत आभारी हैं।खाद्य और कृषि संगठन के अनुमान के अनुसार भारत में लगभग 194.4 मिलियन लोग कुपोषण के शिकार हैं। इस तरह का गंभीर आंकड़ा हमारे लिए खतरे की घंटी है और स्वास्थ्य को लेकर सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी है।कंपनी देशभर में डिजिटल इंडिया और बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के क्षेत्र में अपना योगदान दे रही है।