नई कैशलेस बीमा योजना: एंजियोप्लास्टी कैशलेस, एंजियाेग्राफी नहीं

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जयपुर। राज्य सरकार की 1 अप्रैल से शुरू हो रही नई कैशलेस बीमा योजना ‘आयुष्मान भारत महात्मा गांधी राजस्थान स्वास्थ्य बीमा’ (एबी एमजीआरएसबीवाई) में बड़ी खामी सामने आई है। इस योजना में कार्डियोलॉजी विभाग की एंजियोप्लास्टी जुड़ा एक पैकेज है, जिसका कोड 28310000032 है।

इस कोड में एंजियोप्लास्टी तो कवर हो रही है, लेकिन एंजियोग्राफी नहीं। पूरी योजना में एंजियोग्राफी का कोई पैकेज है ही नहीं। इसके लिए मरीज को 4 हजार रुपए देने होंगे। जबकि इससे पहले भामाशाह योजना में एंजियोग्राफी भी कवर होती थी।

अब यह तो एंजियोग्राफी करके ही तय होता है कि मरीज की एंजियोप्लास्टी होगी या नहीं? क्योंकि यह हार्ट के ब्लॉकेज जानने के लिए जरूरी जांच है। यदि जांच के बाद एंजियोप्लास्टी यानी स्टेंट डालने के लिए उपयुक्त पाया गया तो भी उसे एंजियोग्राफी का पैसा अलग से देना होगा, क्योंकि पैकेज में एंजियोग्राफी नाम की सुविधा नहीं है।

यदि एंजियोग्राफी के बाद एंजियोप्लास्टी की जरूरत नहीं लगी तो भी रोगी को पैसा देना होगा। अब राज्य के मेडिकल कॉलेज स्तर के अस्पतालों में कार्डियोलॉजी विभाग के डॉक्टर असमंजस में हैं। इस समस्या को लेकर स्टेट को लिख चुके, लेकिन अब तक पैकेज में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह योजना 30 जनवरी से चल रही है और 1 अप्रैल से नए स्वरूप में लागू होने जा रही है।

नए अस्पताल में इस योजना के नोडल अधिकारी डॉ. नरेश मेवाड़ा ने बताया कि नए पैकेज संख्या में ज्यादा है, लेकिन ऐसी कई समस्याएं हैं, जिन्हें लेकर हमने स्टेट नोडल अधिकारी को लिखा है। एंजियोग्राफी के अलावा और दिक्कतें आ रही हैं।

  • क्रॉनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) के मरीजों के जनरल वार्ड या आईसीयू में भर्ती करने का कोई पैकेज नहीं है।
  • सीरम पोटेशियल इम बैलेंस होने पर भर्ती किए जाने वाले मरीजों का भी कोई पैकेज नहीं है।
  • हीमो डायलिसिस कैथेटर इंसर्टेशन का कोई पैकेज नहीं है, इससे गुर्दा रोगी परेशान हो रहे हैं।
  • नेशनल इंश्योरेंस एजेंसी डे केयर वाले डायलिसिस मरीजों में 3 से 4 क्वेरी कर रही है, यह बड़ी समस्या हो रही है।
  • बहुत सारे सर्जरी वाले विभागों के क्लीनिकल फोटो अनिवार्य कर दिए हैं, जो पूरी तरह गैर जरूरी है।
  • दूसरे राज्यों के मरीजों का इलाज कर रहे हैं, लेकिन उनके लिए पैकेज नहीं है, ऐसे में राजस्व का नुकसान हो रहा है। पहले ऐसे मरीजों से पैकेज दर से चार्ज लिया जाता था।

4 हजार का सामान मरीज को लाना होगा
कोटा मेडिकल कॉलेज के कार्डियोलॉजी विभाग के एचओडी डाॅ. भंवर रणवां ने बताया कि एंजियोग्राफी में करीब 4 हजार के आइटम मंगाने होते हैं। पहले भामाशाह योजना में यह कवर होती थी, ऐसे में पात्र मरीज को कोई पैसा नहीं देना होता था। लेकिन, नई योजना में यह कवर नहीं हो रही।

ऐसे में योजना में पात्र मरीज को पहले बताते हैं कि उसे एंजियोग्राफी का पैसा अपने पास से देना होगा। हमने वीसी में भी यह मुद्दा उठाया था और हमारे अस्पताल में योजना के नोडल अधिकारियों को भी लिखित में दिया है।