जमीन के नीचे आलू और ऊपर धनिया, जानिए कैसे संभव हुआ यह

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कोटा। जमीन के नीचे आलू की फसल और ऊपर धनिया की, ये चमत्कार कर दिखाया है कैथून स्थित गोयल ग्रामीण विकास संस्थान के जैविक कृषि अनुसंधान केन्द्र की टीम ने। जिससे हाड़ौती में आलू के संग हरे धनिए की संयुक्त पैदावार किसानों को मालामाल कर सकती है।

गोयल ग्रामीण विकास संस्थान कोटा के जैविक कृषि अनुसंधान केन्द्र की टीम द्वारा किए गए नवाचार में आलू की जैविक खेती के साथ धनिया की इन्टरक्रॉप के बेहतरीन परिणाम सामने आए हैं। जिसमें एक ही जमीन पर आलू और धनिए की फसल एक साथ लेना संभव होगा। इसको लेकर कृषि वैज्ञानिक भी उत्सहित नजर आ रहे हैं। भारतीय किसान संघ के प्रवक्ता आशीष मेहता ने बताया कि प्रायोगिक तौर पर किए गए इस नवाचार के परिणामों से हाड़ौतीवासियों को बड़ी सौगात मिल सकती है।

उन्होंने बताया कि हाल ही में जैविक अनुसंधान केन्द्र पर एक ही खेत में एक तरफ आलू की कटाई हो चुकी है तो दूसरी तरफ हरे धनिए की भी कटाई प्रारंभ हो गई है। केन्द्र के निदेशक ताराचंद गोयल ने बताया कि प्रयोग के प्रारंभिक परिणाम बहुत आशानुकूल हैं। अब इस पर गहन शोध के लिए कार्ययोजना बनाई जा रही है। जिससे भविष्य में किसानों को इसका वास्तविक लाभ मिल सके।

उन्होंने बताया कि केन्द्र पर हाल ही में कोटा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. डीसी जोशी, अनुसंधान निदेशक प्रताप धाकड़ व कृषि अनुसंधान केन्द्र उम्मेदगंज के आलू परियोजना के वैज्ञानिक डॉ. बीएल यादव भी निरीक्षण कर चुके है। उन्होंने इस प्रयोग को किसानों के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि बताया है। अब केन्द्र के शोध प्रमुख पवन के टाक आगे की कार्ययोजना तैयार करने में जुटे हैं। पवन टाक ने बताया कि अनुसंधान केन्द्र पर सैकड़ांे तरह की जैविक फसलें फलित हो रही है। जो किसानों के लिए नवीन आयाम है। यहां 100 से ज्यादा तरह के प्रयोग सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहे है।

यूं संभव हुआ दो फसल लेना
भारतीय किसान संघ के प्रवक्ता आशीष मेहता ने बताया कि एक ही जमीन पर एक साथ दो फसलें लेने पर किसानों को अपनी आमदनी दुगुनी करने में मदद मिल सकेगी। प्रायोगिक तौर पर किए गए नवाचार में पहले जमीन पर आलू लगाए गए। जिस पर धनिया भी फैंक दिया। इससे आलू के पौध जमीन पर आने लगी, तब तक धनिया कुछ कमजोर रहा। आलू की फसल करीबन दो से ढाई महीने में तैयार हो गई। इसके बाद आलू के ऊपर की पौध को काट दिया गया। जिसके बाद धनिया भी वृद्धि करने लगा। अब जमीन के अंदर आलू की फसल मौजूद है तो जमीन के ऊपर धनिया। हरा धनिया काटकर बाजार में बेचा जा सकता है और आलू को खोदकर काम में लिया जा सकता है। इससे किसानों को दुगुना लाभ हुआ है। इसके अलावा खाद और रोग प्रतिरोधक दवाएं भी दोनों फसलों के लिए अलग अलग देने की जरूरत नहीं है। इससे किसान की लागत में भी कमी आई है।

एक बीघा में 50 हजार तक अतिरिक्त लाभ
शोध प्रमुख पवन टाक ने बताया कि आलू के संग धनिया की खेती करें तो एक बीघा में एक कटाई से 300 किलो व दूसरी कटाई भी लें तो कुल 500 किलो हरा धनिया आसानी से मिल जाता है। हरा धनिया वर्तमान मूल्य के अनुसार 50 रुपये प्रति किलो की बाजार दर से बिक रहा है। जिससे आलू की खेती से होने वाली आय के अलावा तकरीबन 25000 रुपये प्रति बीघा की अतिरिक्त आय प्राप्त की जा सकती है। इसके साथ दो फसल लेने के लिए दो बीघा जमीन चाहिए।

जबकि संयुक्त खेती करने से एक बीघा खेत से ही काम चल रहा है। जिससे करीबन 15 हजार रुपये खेत का किराया तो बचेगा ही, साथ में एक फसल को दिए जाने वाले बिजली किराया, ट्रेक्टर किराया, अतिरिक्त खाद का खर्च, दवा के छिड़काव समेत अन्य खर्च भी बचेंगे। इसके साथ ही करीबन 50 हजार लीटर पानी की बचत होगी। इससे उत्पादन की गुणवत्ता भी बेहतरीन मिल रही है और सब खर्च की बचत और आय को जोड़ें तो 50 हजार प्रति बीघा तक बचत संभव है।